लोकसभा चुनाव 2019: सियासी दलों की नाकामी की कहानी सुना रहे थे, कश्मीर में सूने बूथ

सूनी गलियां, बंद बाजार, सुरक्षाबलों व शरारती तत्वों के बीच हिंसक झड़पें और विभिन्न इलाकों में वीरान पड़े मतदान केंद्र को पुलवामा-शोपियां में मुख्यधारा के सियासी दलों की नाकामी की कहानी सुना रहे थे। लगभग 5.22 लाख मतदाता इन दो जिलों के छह विधानसभा क्षेत्रों में हैं, लेकिन मतदान करने सिर्फ 2.81 फीसद ही मतदाता पहुंचे।
चुनाव वाले क्षेत्र में बने 695 मतदान केंद्रों मे लगभग 300 में एक भी मतदाता नहीं पहुंचा। अगर कहीं पहुंचे तो उनकी संख्या अंगुलियों पर गिनी जा सकती थी। मतदाताओं से कहीं ज्यादा सुरक्षाकर्मी नजर आते थे जो इस क्षेत्र की संवेदनशीलता की कहानी सुना रहे थे। कश्मीर में अल कायदा की आवाज बने अंसार उल गजवात ए हिंदू के कमांडर जाकिर मूसा के गांव नूरपोरा, हिजबुल मुजाहिदीन के डिवीजनल कमांडर रियाज नायकू, गत दिनों मारे गए हिज्ब आतंकी लतीफ टाईगर के गांव डोगरीपोरा और 14 फरवारी को लिथपोरा में आत्मघाती हमला करने वाले जैश आतंकी आदिल डार के गांव बेहीबाग में एक भी वोट नहीं पड़ा।
बेहीबाग के साथ सटे गुंडीबाग में 350 में से 15 वोट पड़े। कश्मीर में आतंकी हिंसा का रुख मोड़ने वाले आतंकी बुरहान के गांव शरीफाबाद में भी मतदान केंद्र पूरे दिन सूने रहे। गौरतलब है कि अनंतनाग-पुलवामा संसदीय क्षेत्र देश का सर्वाधिक संवेदनशील संसदीय क्षेत्र माना जाता है,जहां सुरक्षा परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने तीन चरणों में मतदान कराया है।
तीसरे व अंतिम चरण में जिला पुलवामा व शोपियां में मतदान कराया गया। इन दोनों जिलों में अलगाववादियों के आहवान पर हड़ताल और चुनाव के मद्देनजर किए गए सुरक्षा प्रबंधों ने सामान्य जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित किया। सिर्फ हाईवे के आस-पास स्थित थोड़ी बहुत दुकानें खुली रही, लेकिन भीतरी इलाकों में सब बंद। चार मतदान केंद्रों पर आतंकियों ने साकेट बम फेंके और दो मतदान केंद्रों पर पेट्रोल बम। हालांकि इनमें किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ,लेकिन मतदान करने कोई नहीं पहुंचा।





