लालू की सपा से नजदीकियों के चलते भरोसा नहीं कर पा रहीं मायावती

बिहार से राज्यसभा जाने की लालसा पाले हैं लेकिन इसके प्रति पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं मायावती
नीतीश, सोनिया के बाद मायावती ने पलटी मारकर निकाल दी लालू प्रसाद की पटना रैली की हवा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। पिछले कई महीने से चल रही पटना रैली के लिए लालू प्रसाद यादव की कवायद को मायावती ने करारा झटका दिया है। ऐन वक्त पर मायावती ने 27 अगस्त की पटना रैली में जाने से इंकार कर दिया है। नीतीश कुमार के झटके से आहत लालू प्रसाद मायावती के बयान से टूट चुके हैं। बसपा सुप्रीमो के ताजा बयान से साफ हो गया है कि जिस महागठबंधन का सपना लालू प्रसाद देख रहे थे वह फिलहाल साकार होने नहीं जा रहा है। इसकी वजह यह बताई जा रही है कि लालू प्रसाद की समाजवादी पार्टी से नजदीकियों के चलते मायावती उन पर भरोसा नहीं कर पा रही हैं।
ध्यान रहे कि लालू प्रसाद यादव ने काफी पहले भाजपा भगाओ देश बचाओ रैली पटना में आयोजित करने का ऐलान किया था। इसके लिए 27 अगस्त की तारीख तय हुई थी। शुरुआती दौर में कहा गया कि लालू और नीतीश कुमार के अलावा इस रैली में सोनिया गांधी, मायावती, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी आदि विपक्षी दलों के नेता शामिल होंगे। लालू प्रसाद यादव इन सभी से बातचीत भी कर चुके थे। पटना रैली के बहाने विपक्षी एकता और महागठबंधन की बात जोरशोर से कही गई। विपक्ष की यह एकता खासतौर पर उत्तर प्रदेश की राजनीति में परिवर्तन के लिए काफी अहम मानी जा रही थी।
2014 के लोकसभा चुनाव में यूपी में कांग्रेस दो, सपा पांच और बसपा शून्य पर सिमट गई थी। ऐसे में इस एकता को खासतौर पर लोकसभा चुनाव की रणनीति पर देखा जा रहा था।
पटना रैली पर सबसे पहला ग्रहण तब लगा जब नीतीश कुमार ने रैली में जाने से मना कर दिया। बाद में तो उन्होंने बिहार में राष्ट्रीय जनता दल से नाता समाप्त करते हुए महागठबंधन से ही बाहर जाने और एनडीए के साथ जाने का फैसला लिया। लालू प्रसाद की पटना रैली के लिए यह सबसे बड़ा झटका था। इसके बाद भी सोनिया गांधी, अखिलेश यादव और मायावती के रैली में पहुंचने की बातें चलती रहीं। एक दिन पहले सोनिया गांधी ने भी साफ कर दिया कि वह रैली में नहीं पहुंच रही हैं लेकिन कांग्रेस के अन्य बड़े नेता वहां पहुंचेंगे। इसके बाद मायावती ने साफ कर दिया कि वह भी रैली में नहीं जा रही हैं। लखनऊ में पत्रकार वार्ता में मायावती ने कहा कि बसपा धर्मनिरपेक्ष ताकतों के साथ एकता चाहती है किंतु पुराने अनुभव अच्छे नहीं हैं। रिजल्ट आने के बाद फजीहत होती है। मायावती ने कहा है कि सीटों के बटवारे के बिना बसपा मंच साझा नहीं करेगी।
सोनिया गांधी और मायावती के इंकार के बावजूद 27 अगस्त को प्रस्तावित पटना रैली के लिए प्रचार सामग्री में बसपा प्रमुख मायावती, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, राजद नेता लालू प्रसाद यादव, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी व तृणमूल नेता ममता बनर्जी की फोटो का इस्तेमाल हो रहा है। हालांकि बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया पर प्रचारित मायावती और अखिलेश यादव के फोटो वाले पोस्टर को खारिज कर दिया था। बसपा प्रमुख ने आज साफ कर दिया कि ऐसे में पोस्टर से बसपा का कोई लेना देना नहीं।
दरअसल बिहार फार्मूला कामयाब नहीं होने पर बसपा जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाना चाहती। यूपी में सपा और बसपा एक मंच पर आते हैं तो उसका परिणाम क्या होगा, इसका आंकलन किया जा रहा है। यह दोनों दल वर्ष 1993 में एक साथ चुनाव लड़े थे और गठबंधन की सरकार बनी थी। बसपा-सपा गठबंधन में मुलायम सिंह मुख्यमंत्री बने थे लेकिन, गेस्ट हाउस कांड के बाद दोनों दलों में ठन गई थी।
पटना रैली में मायावती भले ही न शामिल हो रही हों लेकिन गुजरात में चुनाव से पहले वह बड़े पैमाने पर जनसभाएं करेंगी। वैसे वलसाड़ में एक सितंबर को कांग्रेस की पहल पर प्रस्तावित संयुक्त रैली में मायावती के शामिल होने की संभावना भी कांग्रेसियों द्वारा जताई जा रही है। उल्लेखनीय है कि वलसाड़ क्षेत्र में दलितों की संख्या काफी है और मायावती मानसून सत्र में दलितों के मुद्दे पर राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे चुकी हैं। सूत्रों का कहना है कि मायावती दलित एजेंडे पर मजबूती से कायम रहना चाहती हैं। इसी एजेंडे पर 18 सितंबर से उत्तर प्रदेश में भी मंडलीय रैलियों का सिलसिला आरंभ होगा।

मुलायम ने भी फंसाया पेंच
लालू की पटना रैली और यूपी में सपा-बसपा के एक प्लेटफॉर्म पर आने में सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने भी पेंच फंसा दिया है। मुलायम सिंह यादव ने दो दिन पहले कहा था कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव यदि किसी भी दल से गठबंधन करेंगे तो उन्हें कोई फैसला लेना होगा और यह फैसला अंतिम होगा। मुलायम सिंह यादव के इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं। अब देखना यह है कि मुलायम सिंह की चेतावनी के बाद अखिलेश यादव 27 अगस्त को पटना की भाजपा भगाओ-देश बचाओ रैली में
जाएंगे या नहीं।

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