लापरवाही: सिविल अस्पताल में धूल फांक रहे करोड़ों के वेंटिलेटर, मरीज हलकान

6 माह पूर्व पीआईसीयू के लिए खरीदे गए थे वेंटिलेटर, गंभीर बाल रोगी किए जा रहे रेफर 
पाइप से ऑक्सीजन की सप्लाई न होने से अटका काम 
सीएमएसडी व सिविल अस्पताल के बीच उलझा है मामला

लखनऊ। चिकित्सा स्वास्थ्य महानिदेशालय की उदासीनता के चलते डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी चिकित्सालय (सिविल) में रखे हुए करोड़ों के दस वेंटीलेटर धूल फांक रहे हैं। वेंटिलेटर खरीदे हुए छह माह से ज्यादा समय बीत गया है, लेकिन इसे अभी तक इसलिए नहीं लगाया जा सका है, क्योंकि अस्पताल के बाल रोग विभाग में पाइप से ऑक्सीजन की सप्लाई ही नहीं की जा रही है। स्वास्थ्य महानिदेशालय अभी ऑक्सीजन पाइप लाइन बिछाने व सप्लाई करने का टेंडर तक नहीं निकाल सका है। 
सिविल अस्पताल के बाल रोग विभाग में आने वाले एक वर्ष से ऊपर के गंभीर बच्चों के लिए पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) बनाने का प्रस्ताव अस्पताल प्रशासन ने विभाग बनने के साथ ही किया था। लेकिन शासन की धीमी चाल के चलते विभाग को लगभग चार वर्ष बाद पीआईसीयू बनाने की अनुमति मिली। काफी जद्दोजहद के बाद महानिदेशालय के सीएमएसडी ने यूनिट के लिए दस वेंटिलेटर की खरीद कर ली। हैरत यह है कि वेंटिलेटर की सप्लाई हुए छह माह से ज्यादा समय बीत गया है, लेकिन यह दस वेंटिलेटर अस्पताल के बालरोग विभाग के एक कमरे में पड़े धूल फांक रहे हैं। इस वेंटिलेटर की याद सिविल के अधिकारी कई बार महानिदेशालय में बैठे अधिकारियों को दिला चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई भी अधिकारी इस तरफ अपना ध्यान आकृष्टï नहीं कर सका है। जिससे वेंटिलेटर कब तक लग सकेंगे इसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है। यह वेंटिलेटर सिर्फ इस कारण नहीं लग पा रहे हैं, क्योंकि सिविल अस्पताल के बाल रोग विभाग में सेंट्रलाइज ऑक्सीजन सप्लाई की सुविधा नहीं है। इतना ही नहीं विभाग के किसी भी वार्ड में पाइप लाइन से ऑक्सीजन के सप्लाई की भी कोई व्यवस्था नहीं है। ऑक्सीजन की सुविधा होने के बाद ही यह वेंटिलेटर लगाए जा सकेंगे। 
अधिकारी एक दूसरे पर फोड़ रहे ठीकरा 
वेंटीलेटर अभी तक क्यों नहीं लग सका इसके बारे में सिविल अस्पताल के संबंधित अधिकारियों से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि ऑक्सीजन पाइप लाइन लगवाने का काम महानिदेशालय का है, क्योंकि अस्पताल प्रशासन दो लाख रुपए से ज्यादा का काम नहीं कर सकता है। ऑक्सीजन सप्लाई के लिए जो एस्टीमेट बना है वह इससे कहीं ज्यादा है, इसलिए यह कार्य सेंट्र्रल मेडिकल स्टोर डिपो (सीएमएसडी) के अंडर में आता है। अस्पताल में पाइप लाइन लगवाने के लिए सीएमएसडी को पत्र भेजा जा चुका है, उन्हीं की जिम्मेदारी है, जबकि महानिदेशालय के अधिकारियों की माने तो यह कार्य करवाने के लिए अस्पताल प्रशासन को बोला गया है।

खत्म हो रही है वारंटी 
अस्पताल में रखे वेंटिलेटर की वारंटी धीरे-धीरे खत्म हो रही है। इस ओर भी चिकित्सा स्वास्थ्य महानिदेशालय के अधिकारियों का ध्यान नहीं जा रहा है। यदि अधिकारियों ने इस ओर अभी भी ध्यान नहीं दिया तो ऐसे ही वेंटिलेटरों की वारंटी रखे-रखे खत्म हो जाएगी। मशीन खराब होने के बाद इसे कंपनी से बनवाने के लिए नाको चने चबाने पड़ेंगे। कंपनी भी मशीन को इंस्टाल करने के लिए कई बार पत्र भेज चुकी है, लेकिन अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।

यूनिट न बनने से दूसरे अस्पतालों पर बढ़ा भार

राजधानी में यह यूनिट अभी तक केजीएमयू, डफरिन, झलकारी बाई महिला अस्पताल व डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में हैं। जहां पर मरीजों की संख्या ज्यादा होने के कारण यहां यूनिट पहले से ही भरे रहते हैं। प्रदेश के बाकी जिला अस्पतालों में इस यूनिट की व्यवस्था न होने के कारण प्रदेश से आने वाले गंभीर बच्चों का भार भी राजधानी के इन्हीं यूनिटों पर होता है। 
ई-टेंडर की प्रक्रिया अब शुरू हो रही है, जिसके कारण इसमें देरी हुई है। जल्द से जल्द इसका टेंडर कराया जाएगा। शासन स्तर पर इस पर बात हो चुकी है। ऑक्सीजन पाइप लाइन लगने के बाद मशीनें जल्द से जल्द इंस्टाल कराई जाएगी।
डॉ. पद्माकर सिंह, महानिदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य

ऑक्सीजन पाइप लाइन का टेंडर करना सीएमएसडी का कार्य है। जो अभी तक नहीं किया जा सका है। अस्पताल की ओर से इसमें कुछ नहीं किया जा सकता है। दो लाख से ऊपर का कार्य होने के कारण हमारे हाथ बंधे हुए हैं। 
डॉ. हिम्मत सिंह दानू, निदेशक, सिविल अस्पताल

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