लखनऊ चिड़ियाघर में गंबूसिया मछली का निःशुल्क वितरण

लखनऊ: लखनऊ चिड़ियाघर में प्रदेश का पहला अंडरवाटर एक्वेरियम बनाया जायेगा। इसमें दोनों तरह की समुद्री और ताजे पानी की मछलियों को रखा जा सकता है। यह जानकारी वन मंत्री दारा सिंह चौहान ने वन्य प्राणि सप्ताह के उद्घाटन के मौके पर दी। इस मौके पर वन मंत्री ने सोविनयिर शाॅप और रियलिटी (वर्चुअल रियलिटी एवं आगमेन्टिड रियलिटी) सेवाओं का उद्घाटन किया। इसके अलावा बैटरी चालित गाड़ी पर बैठकर वनमंत्री ने चिड़ियाघर का निरीक्षण भी किया। इस मौके पर प्रमुख सचिव वन एवं वन्यजीव कल्पना अवस्थी,वन संरक्षक एस.के.उपाध्याय और चिड़ियाघर के निदेशक आर.के.सिंह प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
गंबूसिया मछली का निःशुल्क वितरण
चिड़ियाघर के निदेशक आर.के.सिंह ने बताया कि वन्य प्राणि सप्ताह- 2018 के अवसर पर 01 से 07 अक्टूबर तक प्रत्येक दिन गंबूसिया मछली का निःशुल्क वितरण किया जायेगा। इस दौरान इच्छित लोगों को एक जोड़ा गंबूसिया मछली मत्स्य विशेषज्ञ इंद्र मणि राजा द्वारा मुफ्त में दी जायेगी।
उन्होंने बताया कि इस मछली को लार्वा फिश भी कहते हैं। यह 24 घंटे में अपने भार का 40 गुना मच्छर का लार्वा खाती है। यह अण्डे न देकर बच्चे देती है। 20 से 30 दिनों में 80 से 120 बच्चे देती है। ये अपना वंश आगे बढ़ानें के लिए अपने सेक्स को भी बदल लेती है। इनका मुंह ऊपर की तरफ होता है, जो मच्छरों के लार्वा को खाने में सहायक होता है। सभी प्रकार के पानी जैसे नाले, नालियों तालाबों में आसानी से बस जाती है। इनका इस्तेमाल करने से हम मच्छरों की संख्या को निंयत्रित कर सकते है। क्योकि मच्छरों से ही तमाम बीमारिया होती है।
आर. के. सिंह ने बताया कि घरेलू तकनीक से गंबूसिया मछली का उत्पादन करना भी सिखाया जायेगा। मछलीघर पर गंबूसिया को उत्पादित करने की तकनीक का प्रदर्शन भी किया जायेगा, जिससे स्कूल के बच्चे और अन्य लोग देखकर समझ सकें कि इसका उत्पादन घरों में कैसे किया जाये और उत्पादित मछली को घरों के आस पास नाले नालियों में डालनें से मच्छरों की संख्या में कमी आयेगी। इसके अलावा वायर आर्ट, फटिंग, एंकर एम्ब्रोडरी, कार्पेट बनाना, आॅरेगेमी, आॅरगेनिक मिल्क, कचरे द्वारा खिलौने बनाना इन सभी स्टालों का मंत्री ने निरीक्षण किया ।





