रक्षा बंधन पर 27 साल बाद पड़ा ऐसा संयोग, इन राशियों पर पड़ेगा बुरा असर


श्रावण माह की पूर्णिमा को श्रावणी उपाक्रम किया जाता है। लेकिन इस वर्ष ग्रहण होने से उपाक्रम श्रावण शुक्ल पंचमी तिथि या हस्त नक्षत्र युता पंचमी में करना चाहिए जो कि 28 जुलाई को है। ग्रहण या संक्रांति से युक्त दिन में उपाक्रम नहीं करते।
श्रावण शुक्ल पक्ष में श्रवण नक्षत्र के अंतर्गत वेद परायण, स्वाध्याय आदि शुभ कृत्य को ही उपाक्रम कहा जाता है। डा. आचार्य सुशांत राज के अनुसार प्राचीन काल में गुरु अपने शिष्यों के साथ यह कर्म करते थे।
वर्षभर भूलवश हुए पापों के निराकरण के लिए प्रायश्चित के रूप में हेमाद्रि स्नान संकल्प कर दश विध स्नान करने का विधान है। श्रावणी पर्व से ही चारों वेदों का अध्ययन प्रारंभ किया जाता है। इस दिन जनेऊ धारक जनेऊ की पूजा करते हैं।
वृष- मन परेशान, बंधु से विरोध
मिथुन- लाभ एवं उन्नति
कर्क- गृहस्थ में तनाव, क्लेश
सिंह- धन का व्यय, संघर्ष
तुला- कार्य लाभ, वाहन लाभ
वृश्चिक- सफलता, संतान सुख
धनु- बनते कार्यों में बाधाएं
मकर- शरीर कष्ट, उलझनें
कुंभ- खर्च में वृद्धि, धन हानि
मीन- उन्नति, श्रेष्ठ जनों से लाभ





