यहा वेश्यालय की मिट्टी से क्यों बनती है माँ दुर्गा की मूर्तिया जानकर आप भी रह जाएंगे दंग

हमारे देश में हर जाति धर्म के लोग है और इस कारण विभिन्न तरह के त्योहार भी है। सभी लोग अपना अपनी धर्म अनुसार ईशवर की प्राथना करते है।लेकिन हम बात कर रहें सनातन धर्म के बारें में जिस धर्म में मुर्ति पूजा होती है।मूर्तिपूजकों तथा मूर्तिभंजकों के संघर्षों से इतिहास भरा पड़ा है। प्रारंभ में मूर्तिपूजकों के धर्म ही थे।
मूर्तिपूजकों के धर्म के अंतर्गत ही मूर्तिभंजकों की एक धारा भी प्राचीनकाल से चली आ रही थी।प्राचीन अवैदिक मानव पहले आकाश, समुद्र, पहाड़, बादल, बारिश, तूफान, जल, अग्नि, वायु, नाग, सिंह आदि प्राकृतिक शक्तियों की शक्ति से परिचित था और वह जानता था कि यह मानव शक्ति से कहीं ज्यादा शक्तिशाली है
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भारत में वैसे तो मूर्तिपूजा का प्रचलन पूर्व आर्य काल (वैदिक काल) से ही रहा है। भगवान कृष्ण के काल में नाग, यक्ष, इन्द्र आदि की पूजा की जाती थी।मान्यता के अनुसार महाभारत काल तक अर्थात द्वापर युग के अंत तक देवी और देवता धरती पर ही रहते थे और वे भक्तों के समक्ष कभी भी प्रकट हो जाते थे।





