यहां देवी सती के मंदिर में भक्तों को देते हैं खून से सना कपड़ा, जानें रहस्य

असम राज्य की राजधानी दिसपुर से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नीलांचल पर्वत अथवा नीलशैल पर्वतमालाओं पर स्थित मां भगवती कामाख्या का सिद्ध शक्तिपीठ सती के इक्यावन शक्तिपीठों में अहम स्थान रखता है। यहीं भगवती की महामुद्रा (योनि-कुण्ड) स्थित है।पौराणिक कथा अनुसार मां भगवती यहा रजस्वला होती हैं और मां भगवती की गर्भ गृह स्थित महामुद्रा (योनि-तीर्थ) से निरंतर तीन दिनों तक जल प्रवाह के स्थान से रक्त प्रवाहित होता है।
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कहते है जब माता गौरी अपने पिता दक्ष द्वारा किए जा रहे हैं महायज्ञ में शामिल होने जा रही थी तब उनके पति भगवान शिव ने उन्हें वहां जाने से रोक दिया। इस बात को लेकर दोनों में झगड़ा हो गया। और देवी सती बिना अपने पति शिव की आज्ञा लिए वहां चलीं गईं।उनके पिता दक्ष ने भगवान शिव का घोर अपमान किया। अपने पिता के द्वारा पति के अपमान को देवी सती सहन नहीं कर पाईं और यज्ञ की हवन कुंड में ही कूद कर उन्होंने अपनी जीवन लीला समाप्त कर दी।





