मोहिनी एकादशी के व्रत में भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना गया है। इस एकादशी के नियम दशमी तिथि यानी व्रत से एक दिन पहले से ही शुरू हो जाते हैं, जिनका पालन करना जरूरी है। तभी आपको व्रत का पूर्ण लाभ मिल सकता है। चलिए जानते हैं एकादशी व्रत के जरूरी नियमों के बारे में, ताकि आपके व्रत में किसी तरह की बाधा न आए।

कब किया जाएगा मोहिनी एकादशी व्रत?
वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 26 अप्रैल को शाम 6 बजकर 6 मिनट पर शुरू होगी। यह तिथि 27 अप्रैल को शाम 6 बजकर 15 मिनट तक रहने वाली है। ऐसे में उदया तिथि को देखते हुए मोहिनी एकादशी का व्रत सोमवार 27 अप्रैल को किया जाएगा।

एकादशी व्रत के खास नियम
एकादशी व्रत के नियमों का पालन तीन दिनों यानी दशमी की शाम से लेकर द्वादशी पर पारण करने तक करना चाहिए। ऐसे में आपको इन नियमों पर जरूर गौर करना चाहिए –

दशमी तिथि से लेकर द्वादशी तक यानी व्रत के पारण तक कांसे के बर्तन में भोजन करने से बचना चाहिए।
दशमी तिथि की शाम से ही सात्विक और हल्का भोजन करें व किसी भी रूप में चावल का सेवन न करें।
ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए और यदि संभव हो तो जमीन पर सोना चाहिए।

इसके बिना अधूरा है श्रीहरि का भोग
धार्मिक मान्यता है कि तुलसी के बिना भगवान विष्णु भोग स्वीकार नहीं करते। ऐसे में एकादशी की पूजा में श्रीहरि के भोग में तुलसी दल शामिल करना न भूलें। ऐसे में भगवान विष्णु के भोग में शामिल करने के लिए आप एक दिन पहले यानी दशमी तिथि पर ही सूर्यास्त से पहले तुलसी के पत्ते तोड़कर रख सकते हैं।

रखें ये सावधनी
एकादशी के दिन तुलसी में जल करने से बचना चाहिए। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के पावन अवसर पर मां तुलसी, निर्जला व्रत करती हैं। ऐसे में अगर इस दिन पर उन्हें जल अर्पित किया जाए, तो इससे उनका व्रत खंडित हो सकता है। इसके साथ ही एकादशी पर तुलसी तोड़ना या उसे स्पर्श करना भी शुभ नहीं माना जाता।

इसके साथ ही एकादशी के दिन बाल धोने, काटने वा या फिर नाखून आदि काटने की भी मनाही होती है। इसके साथ ही एकादशी की पूजा में काले रंग के कपड़े पहनने से बचें, क्योंकि इसे भी शुभ नहीं माना जाता।

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