मेक इन इंडिया के तहत तैयार हुए देश के दो सबसे शक्तिशाली इंजन अंतिम ट्रायल के लिए तैयार…

मेक इन इंडिया के तहत तैयार हुए देश के दो सबसे शक्तिशाली इंजन अंतिम ट्रायल के लिए तैयार हैं। मधेपुरा के रेल इंजन कारखाने में तैयार 4,500 हार्सपावर का डीजल इंजन और 12 हजार हार्सपावर (छह हजार हार्स पावर के दो) इंजन का भारतीय परिस्थिति में परीक्षण पूरा हो गया है। माना जा रहा है कि इनसे रेल यात्राओं में क्रांतिकारी परिवर्तन आ सकता है। ये शक्तिशाली इंजन लेट-लतीफ रेलवे की छवि को सुपरफास्ट बनाने में मददगार साबित हो सकते हैं।

अब अनुसंधान अभिकल्प व मानक संगठन (आरडीएसओ) जल्द ही दोनों इंजनों की क्षमता परखेगा। परीक्षण में खरा उतरने पर इन रेलवे इंजनों का डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर तेज गति से मालगाड़ियां दौड़ाने में प्रयोग होगा। मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट के तहत तैयार किए गए ये शक्तिशाली इंजन यात्री ट्रेनों को अधिकतम 200 किमी प्रति घंटा की रफ्तार पर दौड़ाने में भी सक्षम हैं। वर्तमान में भारतीय पटरियों पर अधिकतम 4000 हार्सपावर की क्षमता का डीजल इंजन और 5000 हार्सपावर का इलेक्ट्रिक इंजन दौड़ रहा है।

पिछले साल फरवरी में जनरल इलेक्ट्रिक कंपनी (जीई) ने मधेपुरा में स्थापित रेल इंजन कारखाने से 4500 हार्सपावर की क्षमता वाले दो डीजल इंजन तैयार कर लखनऊ के आलमबाग डीजल शेड को भेजे थे। जीई कंपनी के साथ भारतीय रेलवे का करार 2015 में हुआ था। मधेपुरा से 4,500 हार्सपावर के दो डीजल इंजनों के बाद फ्रांस की कंपनी अलस्ट्राम ने 6000 हार्सपावर के दो इलेक्ट्रिक इंजनों का सेट भी मुरादाबाद डिवीजन में आरडीएसओ के ट्रायल के लिए भेजा है। विशेषज्ञों ने सिकंदराबाद के पास 4,500 हार्सपावर वाले इंजन का परीक्षण पिछले एक साल में पूरा कर लिया है। अब यह इंजन अंतिम ट्रायल के लिए आरडीएसओ को जल्द ही सौंप दिया जाएगा। इसके बाद इसका उपयोग हो सकेगा।

नए इंजनों की ये है खासियत

12 हजार हार्सपावर का इंजन मालगाड़ियों को 120 किलोमीटर और एक्सप्रेस ट्रेनों को 200 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ाने में सक्षम है। इंजन डीप फॉग वाचिंग डिवाइस से लैस है। कोहरे में भी इसकी रफ्तार कम नहीं होगी। इंजन के बेपटरी होने की संभावना बेहद कम होगी। किसी भी दुर्घटना की स्थिति में इस इंजन में स्वत: इमरजेंसी ब्रेक लग जाएंगे। इंजन के 90 प्रतिशत पार्ट्स स्वदेशी तकनीक से बने हैं। 4,500 हार्सपावर वाले इंजन की खासियत यह है कि कोई भी खराबी आने से पहले सेंसर इसके रुकने का समय बता देगा। ड्राइवरों के लिए आरामदायक होने के साथ ही इन नए इंजनों में एसी, यूरिनल और डिजिटल डिस्पले की भी सुविधा है।

रफ्तार से छवि बदलने की कवायद

भारतीय रेलवे की आम छवि लेट-लतीफी और बेतरतीबी वाली है। इसकी मुख्य वजह खस्ताहाल ट्रेनें, इंजन और ढांचा है। इसे सुधारने के लिए रेलवे ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। इस प्रोग्राम के तहत ट्रेनों की रैक बदली जा रही है। साथ ही पुरानें इंजनों के उच्चीकरण का भी काम किया जा रहा है। ट्रेन-18 इसी कार्यक्रम का हिस्सा है। इसके अलावा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के जरिए भी मालगाड़ियों को मुख्य रूट से हटाकर, यात्री ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने की योजना पर काम चल रहा है।

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