खतौली रेलवे स्टेशन के पास शनिवार को पुरी-हरिद्वार एक्सप्रेस (उत्कल एक्सप्रेस) के 12 डिब्बे पटरी से उतर गए। यूपी डीजीपी सुलखान सिंह ने बताया कि इस हादसे में 23 लोगों की मौत हुई है और 40 से ज्यादा लोग घायल हैं। रेलवे के स्पोक्सपर्सन अनिल सक्सेना के मुताबिक शाम 5.50 मिनट पर ये हादसा हुआ। हादसे के बाद डिब्बे एक-दूसरे पर चढ़ गए। फंसे लोगों को निकालने के लिए गैस कटर का इस्तेमाल किया गया। एक डिब्बा तिलक इंटर कॉलेज में तो दूसरा डिब्बा नजदीक के एक घर में घुस गया।
40 प्रतिशत ट्रैक पुराने…
– रिटायर्ड अधिकारी व नॉर्दन रेलवे मेन्स यूनियन (एनआरएमयू) के प्रेसिडेंट एसके त्यागी ने बताया कि, ”रेल होदसों का सबसे बड़ा कारण ये है कि हमारे 40 प्रतिशत ट्रैक आउट डेटेड हैं।”
– ”इसके अलावा कई रूट ऐसे हैं जिनके ट्रैक अक्सर खराब रहते हैं। इन ट्रैक्स को मेंटेन कराकर चलाया जा रहा है।”
– ”इतना ही नहीं ट्रैक को सुबह और शाम जांच का नियम है। लेकिन मैन पावर की कमी की वजह से ये जांच भी नहीं हो पा रही। ऐसे में हादसे तो होंगे ही।”
– ”ये बातें सारे अधिकारी जानते हैं, फिर चाहे वो मैनेजमेंट हो या निचले स्तर पर काम कर रहे डीआरएम या अन्य कर्मी। कोई पॉलिसी भी बनती है तो वो फाइल इतनी जगह से घूमती है कि दोबारा मिलती ही नहीं। बस कागजों पर सारी चीजें दी जा रही हैं।”
ट्रैक मैन से लेकर यार्ड स्टाफ तक 1 लाख 80 हजार पद खाली
– एसके त्यागी ने बताया कि, ”पिछले 4 साल से रेलवे में ट्रैक मैन, यार्ड स्टाफ, सेफ्टी और फोन मैन जैसे स्टॉफ के 1 लाख 80 हजार से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। इन पदों पर भर्ती करने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है।”
– ”ट्रैक की जांच करने में जितने कर्मियों की जरूरत है उस हिसाब से भी कर्मी नहीं हैं। ट्रैक की जांच के लिए करीब 40 हजार पद खाली हैं। 2013 में एक बार खाली पड़े पदों को रेलवे रिक्रूटमेंट सेल (आरआरसी) के जरिए भरने की बात हुई थी, लेकिन आज तक वो प्लान सिर्फ प्लान ही है।”
आउट डेटेड मैटेरियल से चल रहा काम
– एनसीआर से रिटायर्ड अधिकारी शिवपूजन झा ने बताया कि, ”आउट डेटेड मैटेरियल से लोकल लेवल पर काम हो रहा है। इस वक्त सभी जगहों पर पीआरसी के स्लीपर (ट्रैक के बीच में लगने वाले सपोर्ट) का इस्तेमाल होने लगा है।”
– ”ऐसे में अभी भी 20 प्रतिशत तक ट्रैक ऐसे हैं जिनके स्लीपर लकड़ी के बने हुए हैं। कई बड़े स्टेशन पर भी 10 में से 3 प्लेटफॉर्म पर लकड़ी के स्लीपर होंगे, वो भी सड़े गए हैं।”
– ”स्लीपर और रेल ट्रैक को जोड़ने के लिए क्लिप का प्रयोग किया जाता है। ये क्लिप्स अक्सर ढीली या खराब हो जाती है। इन्हें रोज देखना जरूरी है। लेकिन मैन पावर की कमी के चलते सभी जगहों पर दोनों टाइम चेक भी नहीं हो पाता है।”