मिश्रा ने कहा कि ‘गुड बाय बोलने’ की जगह कहेंगे ‘फिर मिलेंगे’.

देश के 45वें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के कार्यकाल का सोमवार को आखिरी दिन था. दीपक मिश्रा एक साल से कुछ अधिक समय तक सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रहे. कार्यकाल के आखिरी दिन बार काउंसिल के फेयरवेल प्रोग्राम में दीपक मिश्रा ने कहा कि वह लोगों का आकलन उनके इतिहास से नहीं करते बल्कि उनके लिए लोगों की गतिविधियां और दृष्टिकोण आकलन करने में सहायक हैं.
दीपक मिश्रा को 10 अक्टूबर 2011 को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया. लगभग सात साल बाद उन्हें 28 अगस्त 2017 को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस पद की जिम्मेदारी मिली. दीपक मिश्रा के बाद जस्टिस रंजन गोगोई को देश का 46वां चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजीआई) नियुक्त किया गया है. चीफ जस्टिस बनने वाले जस्टिस रंजन गोगोई नार्थ-ईस्ट राज्य से जज हैं.
कार्यकाल के आखिरी दिन दीपक मिश्रा ने उम्मीद जताई कि उनके विषय में अबतक कही गईं अच्छी बातें महज शिष्टाचार में न कही गई हों. दीपक मिश्रा ने कहा कि बार के युवा सदस्यों से हमें शक्ति मिलती है और अनुभव का हम सम्मान करते हैं.
दीपक मिश्रा ने कहा, सच्चाई का कोई रंग नहीं होता और सच्चाई वैसी भी नहीं होती जैसी हमें दिखाई जाती है. दीपक मिश्रा ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया में अधिवक्ताओं का बड़ी जिम्मेदारी से भरा किरदार है. बार काउंसिल के प्रोग्राम में दीपक मिश्रा ने कहा कि वह बार के ऋणी हैं और वह पूरी संतुष्टि के साथ बार से जा रहे हैं. दीपक मिश्रा ने कहा कि दिल से बार का सम्मान करते हैं लेकिन वह बार को ‘गुड बाय बोलने’ की जगह कहेंगे ‘फिर मिलेंगे’.

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