भारतीय बाजार में चाइनीज राखी की बिक्री पर रोक से चीन को हुआ बड़ा नुकसान

चीन के साथ डोकलाम विवाद का असर अब बाजार पर भी दिखने लगा है। राखी का सामान बेचने वाले व्यापारियों का कहना है कि मार्केट में चीन के उत्पादों की मांग में भारी कमी देखने को मिल रही है।
कई जगह चीनी राखी पर व्यापारियों ने ही रोक लगा रखी है। इस बार चीनी राखियों के भारत में ना बिकने से चीन को करीब 800 करोड़ का नुकसान होगा।व्यापारियों का मानना है कि शायद जनभावना के कारण या फिर देशभक्ति की वजह से चीनी राखियां इस साल बाजार से गायब हैं। भारत में बनी राखियों से बाजार सजा हुआ है और उनकी ही अच्छी बिक्री भी हो रही है।
रक्षाबंधन इस साल 7 अगस्त को है। सोशलमीडिया पर चीन के उत्पादों के बहिष्कार की मुहिम चल रही है और इसका बड़ा असर देखने को मिल रहा है। राखी के सामान में चीन के उत्पाद नदारद नजर आ रहे हैं। शाहगंज के राखी विक्रेता मुकेश ललवानी कहते हैं, ‘इस साल खुद रक्षाबंधन के सामानों की बिक्री करने वाले दुकानदारों ने बड़ी संख्या में चीन के उत्पादों के बहिष्कार का फैसला किया है। चीन हमारे पैसों का प्रयोग हमें ही धमकाने के लिए कर रहा है। हम उन्हें पैसे कमाने का मौका क्यों दें?’
ललवानी ने बताया, ‘इस बार हमारे पास सिर्फ भारत में बनी राखियां ही हैं। ग्राहक भी उनकी ही डिमांड करते हैं। यह सही है कि भारत में बने उत्पादों की लागत अधिक होने के कारण उन पर कम मुनाफा मिलता है, लेकिन फिर हम सोचते हैं कि हिंदुस्तानी उत्पादों को बेचने पर पैसा देश में ही रहेगा।’





