भंग होगा उत्तराखंड का स्पर्श गंगा बोर्ड, ये है कारण


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बीजेपी राज में उदय, बीजेपी राज में अंत
यह दिलचस्प तथ्य है कि स्पर्श गंगा बोर्ड का उदय बीजेपी राज में हुआ और अंत भी बीजेपी के ही राज में होने जा रहा है। 2010 में हरिद्वार में महाकुंभ था। इससे पहले, दिसंबर 2009 में तत्कालीन सीएम डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने स्पर्श गंगा बोर्ड का एलान कर दिया। हालांकि इसका विधिवत गठन फरवरी 2010 में हुआ। गढ़वाल विश्वविद्यालय के डा. प्रभाकर बडोनी को स्पर्श गंगा बोर्ड में ओएसडी बनाया गया था। बोर्ड में पदेन अध्यक्ष सीएम थे।
तत्कालीन निशंक सरकार ने सुप्रसिद्घ सिने अभिनेत्री हेमा मालिनी और अभिनेता विवेक ओबराय को स्पर्श गंगा बोर्ड का ब्रांड एंबेसडर बनाया था। इसी तरह, चार अप्रैल 10 को स्पर्श गंगा के प्रमोशन के लिए ऋषिकेश में बड़ा कार्यक्रम किया गया था, जिसमें पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, धार्मिक गुरु दलाई लामा समेत कई नामचीन हस्तियों ने भाग लिया था।
न तो ढांचा हुआ तैयार, न जुटे संसाधन
-गंगा और उसकी सहायक नदियों में हो रहे प्रदूषण को रोकने के लिए इस बोर्ड का गठन किया गया था। इसके तहत, विभिन्न स्कूल-कॉलेजों और स्वयंसेवी संगठनों के माध्यम से जागरूकता के कार्यक्रम आयोजित किए गए। हालांकि इस दौरान भी न तो इस बोर्ड का ढांचा तैयार हो पाया और न ही इसके लिए बजट की व्यवस्था हो पाई। जैसे तैसे कार्मिकों की तनख्वाह निकलती रही। और तो और इसका अपना कार्यालय भी नहीं खुल पाया। पर्यटन निदेशालय में यह बोर्ड चलता रहा। 2012 में कांग्रेस सरकार के आने के बाद बोर्ड की गतिविधियों पर विराम लग गया।





