पूरी तरह से बदल जाएगी देश में अगले साल से डीजल की इकोनॉमी, जानें क्यों?

देश में आने वाले समय में डीजल वाली कारों में भारी गिरावट आने की संभावना है। अगले साल बीएस-6 मानक लागू होने जा रहा है जिसकी वजह से देश की डीजल इकोनॉमी में बड़े बदलाव की शुरुआत हो जाएगी। इसके साथ ही बड़ी कार कंपनियां डीजल कारों के उत्पादन से हाथ खींच सकती है।

देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी पहले ही डीजल कारों की बिक्री बंद करने की घोषणा कर चुकी है। वहीं कुछ दूसरी कार कंपनियां ने भी अपने कई डीजल संस्करणों को वापस लेने का मन बना लिया है, जिनके बारे में जल्द घोषणा होने की संभावना है। कम से कम एक दर्जन कॉम्पैक्ट कारों के बंद होने की बात फिलहाल कही जा रही है और देश में डीजल की मांग में भी कमी आने के आसार है जिसे देखते हुए तेल कंपनियां भी अपनी रणनीति बदल रही हैं।

तेल कंपनियों का कहना है कि भविष्य में वे डीजल के बजाय सीएनजी की मार्केटिंग व उत्पादन पर ज्यादा ध्यान देंगी। पेट्रोलियम मंत्रालय का भी यह मानना है कि डीजल मांग की वृद्धि दर अब बहुत सुस्त होगी। मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष के दौरान डीजल की मांग 8.64 करोड़ टन रहने का अनुमान लगाया है जो पिछले वित्त वर्ष से महज तीन फीसद ज्यादा है। कुछ वर्ष पहले तक डीजल की मांग में सालाना छह-सात फीसद का इजाफा होता था।अगर आप भी करते है Air India की फ्लाइट से सफर, तो आपके लिए आई बेहद अच्छी खबर…

अब मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (पीपीएसी) से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार डीजल की मांग में आने वाले दिनों में बड़ी कमी आ सकती है। इसका कारण यह है कि सरकार ने लंबी दूरी के चलने वाले ट्रकों में भी सीएनजी के इस्तेमाल की योजना बनाई है। इसके लिए सभी राष्ट्रीय राजमार्गों के पास सीएनजी स्टेशन खोलने की तैयारी है, ताकि ट्रकों को भी स्वच्छ ईंधन मिल सके। इसके अलावा विद्युतीकरण की वजह से रेलवे में डीजल की खपत कम हो चुकी है। साथ ही बिजली बनाने में डीजल का काफी इस्तेमाल हो रहा था लेकिन बिजली की पर्याप्त आपूर्ति से यहां भी खपत कम हो चुकी है।

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