बजट सत्र में पेश हो सकता है जीएसटी कानून का संशोधन विधेयक
नई दिल्ली। जीएसटी संग्रह घटने के बाद सरकार इसकी चोरी रोकने के उपाय करने में जुट गई है। इसी दिशा में कदम उठाते हुए केंद्र ‘जीएसटी (राज्यों को क्षतिपूर्ति) कानून, 2017’ में संशोधन की तैयारी कर रहा है। इस कानून में संशोधन के बाद पान मसाला बनाने वाली कंपनियों को उनकी उत्पादन क्षमता के आधार पर जीएसटी सेस देना होगा।
सूत्रों ने कहा कि ‘जीएसटी (राज्यों को क्षतिपूर्ति) कानून, 2017’ में संशोधन कर एक नई धारा 8ए जोड़ी जा सकती है। इस धारा में स्पष्ट तौर पर यह प्रावधान किया जाएगा कि पान मसाला और अन्य ऐसी वस्तुएं, जिनके जरिये जीएसटी व सेस की चोरी की आशंका है, उन पर मैन्यूफैक्चरिंग के समय ही उत्पादन क्षमता जैसे मानकों के आधार पर जीएसटी सेस वसूल लिया जाए। ऐसा होने पर पान मसाला कंपनियों को उनकी उत्पादन क्षमता के आधार पर ही सेस का भुगतान करना होगा, जबकि उसके बाद के स्टेज पर सेस का भुगतान नहीं करना पड़ेगा।
दरअसल, जीएसटी व सेस का भुगतान किसी वस्तु या सेवा की आपूर्ति होने पर किया जाता है। पान मसाला के संबंध में भी अब तक यही व्यवस्था है। लेकिन कुछ जगहों से ऐसी सूचनाएं मिली हैं कि कंपनियां छोटे ट्रकों का इस्तेमाल कर जीएसटी व सेस चुकाए बिना ही अपना माल बाजार में पहुंचा रही हैं। ऐसे में उनसे आपूर्ति के बजाय उत्पादन क्षमता के आधार पर मैन्यूफैक्चरिंग के स्टेज पर ही जीएसटी सेस लेने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है।
सूत्रों ने कहा कि जीएसटी कानून में संशोधन सुझाने के लिए गठित की गई ‘लॉ रिव्यू कमेटी’ ने क्षतिपूर्ति कानून में इस संशोधन की सिफारिश की है। जीएसटी काउंसिल की 18 जनवरी को हुई 25वीं बैठक में ये सिफारिशें चर्चा के लिए रखीं गईं। अब जीएसटी काउंसिल क्षतिपूर्ति कानून में संशोधन के मसौदे को अंतिम रूप देगी। फिर इसे कानून मंत्रलय के पास भेजा जाएगा। इसके बाद ही इस विधेयक को संसद के आगामी बजट सत्र के दूसरे चरण में पेश किया जाएगा।
असल में पान मसाला पर 28 फीसद जीएसटी और 89 से 204 फीसद तक सेस लगता है। ऐसे में इसके जरिये जीएसटी व सेस की चोरी की आशंका अधिक रहती है। सरकार ने यह कदम ऐसे समय उठाया है, जब हाल के महीनों में जीएसटी सेस के रूप में संग्रहित धनराशि अपेक्षा से कम रही है।
क्षतिपूर्ति सेस के रूप में वसूली गई धनराशि से ही केंद्र सरकार राज्यों के राजस्व में कमी की भरपाई करती है। सूत्रों के मुताबिक, अगस्त से दिसंबर के दौरान क्षतिपूर्ति सेस से हर महीने औसतन 7,615 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। वहीं, इस दौरान राज्यों के राजस्व संग्रह में जो कमी रही है, उसका आंकड़ा काफी अधिक है। मसलन, दिसंबर में ही सभी राज्यों को 8,894 करोड़ रुपये की राजस्व हानि हुई, जबकि इस महीने में क्षतिपूर्ति सेस से मात्र 7,848 करोड़ रुपये का ही राजस्व प्राप्त हुआ।





