फ्रेंडशिप करने जा रहे हैं तो याद रखें ये टिप्स

बेकार की फ्रेंडशिप्स से निजात पाएं और केवल वही दोस्ती निभाएं जो आपके लिए अहम हों। दोस्ती ज्यादा कॉम्पलिकेटेड नहीं होनी चाहिए। हम अपने दोस्तों से एक वक्त के बाद चाय या कॉफी पर बात करने के अलावा भी कुछ उम्मीदें पालने लगते हैं। हमारे पास उनसे मिलने का भी कम समय होता है।
ऐसे में धीरे-धीरे हमें समझने आने लगता है कि कौन-सी यारियां और दोस्त आगे तक साथ निभाएंगे और कौन-सी ऐसी हैं जो अपना कीमती वक्त जाया करने के लायक हैं ही नहीं। बहुत-सी दोस्तियां हमारी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती हैं। यहां सुझाव दिए हैं कि कैसे आप उन दोस्तियों को छांट सकते हैं।
REVALUATE YOUR FRIENDSHIPS
अपने सभी दोस्तों की एक लिस्ट तैयार करें। इनमें से उन्हें हटा दें जो आपको खुशी नहीं देते हैं। ऐसे भी हटा दें जो आपको डल, उदास, ड्रमैटिक, मोटा या छोटा महसूस करवाते हैं। सच तो ये है कि दोस्ती भी कड़वी हो सकती हैं, इनमें भी जलन पैदा हो सकती है और या फिर आपकी लाइफ जैसे-जैसे बदलती जाएगी या बढ़ती जाएगी वैसे-वैसे पुरानी दोस्तियां जो ज्यादा पक्की नहीं होती हैं वो गायब होने लगती हैं।
वो स्पार्क्स जो किसी रिश्ते से आपको मिला करते थे वो अब वैसे नहीं रह जाते हैं। डिम हो जाते हैं। अच्छा है कि जीवन में हम घर की ही तरह दोस्तियां डीक्लटर करते चलें। अगर किसी दोस्त के होने या नहीं होने से आपको कोइ खास फर्क नहीं पड़ता है। या परेशानी होती है तो बेहतर होगा कि आप उसे भूल जाएं।
STOP COMPETING
दोस्ती है तो कॉम्पिटिशन या कम्पैरिजन करना गलत होगा। अगर आपके मन में किसी भी दोस्त के साथ कॉम्पिटिशन की भावना जागती है तो ये ठीक नहीं है, चाहे ऐसा सबकॉन्शियस लेवल पर ही क्यों न हो रहा हो। ऐसा करने से रोकें। खुद से सवाल करें कि क्या मैं इस दोस्त के साथ को-ऑपरेटिव हूं या नहीं। अगर नहीं तो कोशिश करें।
MAKE SURE YOUR FRIENDSHIPS WORK BOTH WAYS
ज्यादातर यारियां तभी चलती हैं जब आप दोनों ही इसके लिए आगे बढ़ें और या फिर आपके बीच सभी चीजें बराबर हों। ऐसे दोस्त कोई नहीं चाहता जो केवल अपने बारे में ही बात करें और मदद या सपोर्ट चाहिए है तो उसके लिए हमेशा आपके पास भागें, लेकिन आपको कुछ काम हो तो समय की कमी या अन्य कोई बहाना बना दें।
इस बात का अहसास दिलाना बहुत जरूरी हो जाता है, नहीं तो आप दोस्त की सेल्फिश इमेज कैरी करने लगते हैं। हो सकता है आपको इस दोस्त से बात करना डरा देता हो या हो सकता है वो आप हैं जो अपनी दोस्ती में सेल्फिश पार्ट प्ले कर रहे हैं और बिलकुल भी गिविंग नहीं हैं। अगर ऐसा कई बार हो चुका है और रुकने की कोई सम्भावना भी नजर नहीं आती है तो बेहतर होगा कि इस बारे में कुछ किया जाए।
WIDEN YOUR SOCIAL CIRCLE
स्वाभाविक-सी बात है कि हम अपनी तरह से जीवन बिताते हुए ज्यादा खुश रहते हैं। नए लोग मतलब न्यू टाइम शेड्यूल, नई जिम्मेदारियां, नए तनाव और नई परेशानियां। हो सके तो नए रिश्तों को अपनी पर्सनैलिटी को ढीला करने का एक साधनभर मानें। देखें कि कैसे आप अलग-अलग लोगों से अलग-अलग तरह का व्यवहार करते हैं।
खास तरह के लोग हमारे अंदर भी ख़ास तरह के ट्रेट्स पैदा कर देते हैं। जितने ज्यादा लोगों से मिलेंगे उतना ही आसानी से आप अपने दोस्तों को परख पाएंगे और समझ पाएंगे कि क्या और किस तरह के लोग आपको खुशी देते हैं और आगे क्या करना है।
THINK BEFORE YOU SPEAK
जब भी आपको खुद पर यह भरोसा नहीं हो कि अपने दोस्त से क्या बात करने वाले हैं तो ऐसे में बात करना पूरी तरह से अवॉयड ही करें। ऐसे में आप उसका दिल दुखाने से बच जाएंगे हालांकि आप ऐसा चाह नहीं रहे होंगे लेकिन फिर भी कई बार दिल ना चाहते हुए भी किसी बात से दुख जाता है। कई बार सलाह की जरूरत नहीं होती लेकिन फिर भी हम सलाह देने से बाज नहीं आते हैं। अगर आपका दोस्त आपसे सलाह मांगे तो केवल इतना कहें की ‘मैं नहीं जानता की क्या करना चाहिए तुमको लेकिन अगर तुम्हारी जगह मैं होता तो ये करता।’
BEWARE OF ‘BEST FRIENDS TAG’
मजबूत रिश्ते दोस्ती के तब बुझने लगते हैं जब किसी एक की शादी हो जाती है। कई बार ऐसे में कुछ गहरी दोस्तियां बिखर जाती हैं या शायद आप दोनों ही अलग रास्तों पर चलने लग जाते हैं। या फिर दोस्ती की गहराई ही सफोकेशन पैदा करने लगती है। या फिर आपके जीवन में अन्य प्रयोरिटीज आ जाती हैं। याद रखें कि परफेक्ट फिट कोई नहीं होता है।
अगर आप एक ही दोस्ती में अपना सबकुछ इन्वेस्ट कर देते हैं और किसी दिन आप उसे खो देते हैं तो आपके पास कुछ नहीं बचेगा। बहुत अच्छा लगता है जब कोई अपनी वेवलेंथ का मिल जाता है और जिसके इंटरेस्ट आपके इंटरेस्ट से मैच हो जाते हैं और जिसका ‘सेन्स ऑफ ह्यूमर’ भी आप समझते हों लेकिन फिर भी आप किसी की उम्मीदों से नहीं बच सकते।





