प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नाराज है कश्मीरी लोग, महबूबा मुफ्ती पर भी बढ़ रहा है उनका गुस्सा


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हालात लगातार बिगड़ रहे हैं और कश्मीरियों के दिल में केंद्र और रियासत सरकार के बाबत जो एक उम्मीद जगी थी, वह दम तोड़ती दिख रही है। इन पंक्तियों के लेखक ने 2014 की बाढ़ के दौरान भी कश्मीरियों से श्रीनगर से लेकर अनंतनाग तक कई स्थानों पर बातचीत की थी। तब मोदी कश्मीरियों के भी हीरो थे, लेकिन बदले हालात में कश्मीरी मोदी को भी कठघरे में खड़ा कर रहे हैं।
शायद यही कारण है कि कभी अलगाववादियों को दरिया में डुबो देने की बात करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला अब अलगाववादियों से बातचीत पर जोर देते हैं और पत्थरबाजों को आजादी का सिपाही बताने लगे हैं। पीडीपी और नेकां के अधिकांश नेता मानते हैं कि इस हालात में मुख्यधारा के कश्मीरी दलों के सामने वजूद का संकट खड़ा हो रहा है।
मुगल गार्डन निशात बाग के सामने बीस साल से रेहड़ी लगाने वाले मोहम्मद शोबान आखून कहते हैं कि मोदी को जंग करनी है तो करे इस कश्मीरी को केंद्र से अधिक रियासत सरकार से शिकायत है। आखून ने कहा उनके दो बेटे हैं और दोनों मजदूरी करते हैं। फिलहाल तरबूज बेचने के लिए रिहाड़ी लगाई है। पूंजी नहीं रही। दो दिन में दो तरबूज भी नहीं बिके। कैसे करें घर का गुजारा? इन बूढ़ीं आंखों में आतंकवादियों के प्रति भी गुस्सा है। अलगाववादियों के प्रति नफरत है, लेकिन केंद्र और रियासत सरकार के प्रति उससे अधिक गुस्सा है।
दिहाड़ी लेकर पत्थर फेंकने वाले उपद्रवियों और पाकिस्तान के पैसे पर पांच सितारा जिंदगी जीने वाले अलगाववादियों के बारे में पूछे जाने पर आखून सरकार को ही दोषी ठहराते हैं। वह कहते हैं कि पैसे पाकिस्तान से आ रहे हैं तो अब तक रोका क्यों नहीं।
निशात बाग में टिकट काउंटर पर तैनात मुश्ताक अहमद कहते हैं कि इस सीजन में हर साल दिन में 15 हजार तक टिकट बिकते थे और आज एक दिन में हजार का आंकड़ा भी पूरा नहीं होता है।





