पीएम मोदी के डांसर है नीतीश! जब चाहेंगे मोदी तब नाचेंगे नीतीश

नई दिल्लीः बिहार में महागठबंधन से नाता तोड़ बीजपी के साथ मिलकर सरकार बनाने वाले नीतीश कुमार पर लालू यादव के हमले लगातार जारी है. लालू के निशाने पर नीतीश कुमार ही नहीं है, वर्तमान उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार पर भी वे करारा वार कर रहे हैं.
अभी दो दिन पहले ही उन्होंने नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए कहा था कि वह खुद ही लालची हैं, वह हमको क्या सिखाएंगे की लालच न करें. उन्होंने भागलपुर के भूमि घोटाले में बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दोनों के शामिल होने के भी आरोप लगाए थे.
हाल ही में लालू ने नीतीश पर अपना सबसे बड़ा वार करते हुए कहा है कि पीएम मोदी नीतीश कुमार को अपनी उंगलियों पर नचाएंगे. यहीं लालू ने ये भी कहा कि पीएम मोदी के इशारे पर नीतीश को घुंघरू बांध के नाचना पड़ेगा.
हालांकि जेडीयू की ओर लालू के बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसका जवाब जरूर देंगे. आपको बता दें कि लालू ने अपने ट्वीट में कहा कि “नरेन्द्र मोदी ने नीतीश कुमार को अपने सूंड़ में लपेट लिया है. अब वो नीतीश कुमार को अपने हिसाब से नचाएंगे और उसे घुंघरू बांध नाचना पड़ेगा.”
सुशील मोदी पर लगाए गंभीर आरोप
नरेन्द्र मोदी ने नीतीश कुमार को अपने सूँड़ में लपेट लिया है।अब वो नीतीश कुमार को अपने हिसाब से नचाएंगे और उसे घुँघरू बाँध नाचना पड़ेगा।
— Lalu Prasad Yadav (@laluprasadrjd) 8 August 2017
लालू ने पूर्व में भी वित्त मंत्री रहे सुशील के कार्यकाल के दौरान इस गबन की शुरुआत होने का आरोप लगाते हुए पूछा कि वह इतने दिनों तक क्या कर रहे थे. पशुपालन घोटाला में मुझ पर अगर इस आधार पर मुकदमा चला कि उन दिनों मैं वित्त विभाग का प्रभारी मंत्री था और मैं राजकोष से निकासी को रोक पाने में कथित रूप से असफल रहा तो ऐसी स्थिति में सुशील पर भी इस विफलता के लिए मुकदमा चलना चाहिए.
इतना ही नहीं, राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने भागलपुर जिला में संचालित गैर सरकारी संस्था (एनजीओ) सृजन महिला सहयोग समिति द्वारा सरकार का करोड़ों रुपये का घपला किए जाने की सीबीआई से जांच कराए जाने की मांग की.
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लालू ने दावा किया कि पिछले गुरुवार को प्रकाश में आए इस घोटाले की राशि अब बढ़कर 1000 करोड़ रुपये पहुंच चुकी है और इस राशि को प्रदेश के बाहर ले जाए जाने के अलावा रियल एस्टेट के कारोबार में लगाया गया है. इसमें मनी लॉन्ड्रिंग होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि इस गबन में बैंक की मिलीभगत है, इसकी जांच के लिए राज्य की जांच एजेंसी सक्षम नहीं है. इसलिए, इसकी जांच सीबीआई एवं प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) करे .





