पार्किंग ठेके के नाम पर लखनऊ विवि में गोलमाल, जेबें भर रहे अधिकारी

बिना टेंडर हजारों में दिया जा रहा लाखों का ठेका, मिलीभगत से जारी है खेल
आठ साल से नहीं हुआ टेंडर, ठेकेदार काट रहे चांदी, अधिकारी झाड़ रहे पल्ला
लखनऊ। लखनऊ विश्विविद्यालय में पार्किंग के ठेके के नाम पर जमकर गोलमाल हो रहा है। यहां के अधिकारी अपने चहेतों को बिना टेंडर निकाले लाखों का ठेका हजारों में दे रहे हैं। मिलीभगत का यह खेल पिछले आठ सालों से चल रहा है। वहीं इसके एवज में अधिकारी मोटी रकम वसूल रहे हैं। इस मामले में कई बार शिकायत की गई लेकिन विश्विविद्यालय प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। वहीं अधिकारी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं।
एक ओर लखनऊ विश्वविद्यालय कम आय का रोना रोता है तो दूसरी ओर उसके अधिकारी भी उसे चूना लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं। हर साल विश्वविद्यालय को लाखों रुपयों की चपत लग रही है। यह सब पार्किंग के ठेके में खेल कर किया जा रहा है। लाखों की कमाई के ठेके कुछ हजार में दिए जा रहे हैं। ठेकेदार से मिलीभगत कर अधिकारी अपनी जेबें भर रहे हैं। बताते चलें कि पिछले आठ वर्षों से विवि में पार्किंग के ठेके के लिए टेंडर नहीं निकाला गया है। लविवि के गेट नम्बर एक से पांच तक सभी जगहों पर पार्किंग है। गेट नंबर दो, चार व पांच विवि के अधीन आने वाली पार्किंग है, जबकि गेट नंबर एक व तीन की पार्किंग ठेके पर दी जाती है। इन्हीं पार्किगों का हर वर्ष ठेका मिलीभगत से किया जा रहा है। अधिकारी अपने चहेते ठेकेदारों को इन पार्किंगों का ठेका दे रहे हैं। वर्ष 2009 में इसके लिए अन्तिम बार टेंडर हुआ था, इसके बाद गेट नम्बर एक व तीन की पार्किग का टेंडर नहीं निकाला गया। यही नहीं लाखों के पार्किंग के ठेके को बिना टेंडर कराये चालीस हजार रुपये में उठा दिया गया है। इसमें कई अधिकारियों की मिलीभगत रहती है। वे इसके जरिए अपनी जेबें भर रहे हैं। यही नहीं विवि की पार्किंग से यदि गाड़ी चोरी हो जाए तो ठेकेदार के गुर्गें मारपीट करने पर उतारू हो जाते हैं।
गेट नम्बर दो, चार व पांच के पार्किंग की व्यवस्था लविवि के जिम्मे है, ऐसे में रोजाना हजारों की संख्या में गाडिय़ां आती हैं और उनसे दस से लेकर चालीस रुपये तक वसूला जाता है। पिछले सत्र में आधा दर्जन से अधिक वाहन चोरी व वाहन से मोबाइल व पर्स चोरी जैसे डेढ़ दर्जन घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन ठेकेदार मानने को तैयार नहीं होते हैं। यही नहीं जब इसकी शिकायत प्रॉक्टर विनोद सिंह के पास पहुंचती है तो वे भी ‘अनुशासन’ का डंडा चलाते हुए छात्रों को ही नसीहत दे डालते हैं। छात्रनेता अंकित सिंह ‘बाबू’ का आरोप है कि पूर्व व मौजूदा प्रॉक्टर अपनी सुविधा के हिसाब से ठेकेदारों को नियुक्त कर रहे हैं।
सडक़ पर उतरेंगे छात्र
समाजवादी छात्रसभा की विवि इकाई के अध्यक्ष राकेश ने कहा कि गुरुओं के इस भ्रष्टाचार पर कुलपति ध्यान नहीं दे रहे हैं। वे इस मामले को लेकर राज्यपाल से शिकायत कर चुके हैं और जल्द इस खुली लूट के खिलाफ पैदल मार्च करेंगे। वहीं आइसा नेता पूजा शुक्ला ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्राओं को मुफ्त पार्किंग की सुविधाएं उपलब्ध करायें। एबीवीपी के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य विवेक सिंह ‘मोनू’ का कहना है कि छात्रों से सुविधाओं के नाम पर वसूले जा रहे पैसे का बंदरबांट लविवि के अधिकारी कर रहे हैं, ऐसे में कुलपति को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए। छात्राओं को निशुल्क पार्किंग दी जानी चाहिए।
क्या कहते हैं अधिकारी
लविवि के सहायक प्रवक्ता एके सिंह का कहना है कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। विवि के प्रवक्ता प्रो.एनके पांडेय ही इस मामले में जानकारी दे सकेंगे।





