पनगढ़िया बोले- मैं भारत माता की सेवा करने के लिए आया था; यह सिर्फ एक पड़ाव, मंजिल नहीं

योजना आयोग की जगह बनाए गए नीति आयोग के पहले उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया। 31 अगस्त को उनका आखिरी वर्किंग-डे होगा। फिर कोलंबिया यूनिवर्सिटी लौट जाएंगे। हर कोई जानना चाह रहा है कि आखिर उन्होंने 31 माह में ही इस्तीफा क्यों दे दिया?

जिसे इस्तीफा कह रहे हैं, वह इस्तीफा नहीं है। मैं कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ाता था। देश को दिशा देने के लिए नई संस्था की जिम्मेदारी के बारे में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया तो मैं तैयार हो गया। यह भारत माता की सेवा का मौका था। इसे हर भारतीय खुशी से स्वीकार करता। यह सिर्फ एक पड़ाव था, मंजिल नहीं। अब ढाई साल से ज्यादा समय बाद मैं अपने मूल कार्य अध्यापन की ओर लौटना चाहता हूं। मैंने प्रधानमंत्री को यह इच्छा बताते हुए उन्हें एक अनुरोध पत्र भेजा। उन्होंने इसे मंजूरी दे दी।
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कोलंबिया यूनिवर्सिटी में कोई रिटायर नहीं होता है। जब तक आपका शरीर और मन कार्य करता है, तब तक आप काम कर सकते हैं। मुझे वहां से संदेश आया कि मैं लंबे समय से छुट्टी पर हूं। नियमों के तहत मुझे बताना होगा कि मैं लौट रहा हूं या नहीं। ऐसे में मैंने फैसला किया कि मुझे वहां लौटना ही चाहिए, जहां से मुझे पहचान मिली है। वह क्षेत्र शिक्षा है। यह फैसला किसी दूसरे एंगल से नहीं देखना चाहिए। यहां मुझे सरकार और नौकरशाही का हरसंभव साथ मिला। कई बार तो अधिकारियों का उत्साह और सरकार का समर्थन मेरी जरूरत से भी ज्यादा रहा।
ग्रोथ की बात करें तो आज दुनिया में भारत का नाम बड़े सम्मान से लिया जाता है। विकास दर आने वाले समय में तेज होगी। सरकार की नीतियों में लचीलापन लाने की पहल और सधे हुए फैसलों से इंडस्ट्री उत्साहित है। प्रधानमंत्री की डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने की पहल और नीति, एअर इंडिया जैसे बीमार सरकारी उपक्रमों पर ठोस निर्णयों ने साफ कर दिया कि मोदी सरकार राजकोषीय घाटे पर सजग है। यह भारत के प्रति भरोसा ही है कि दुनिया के कई मुल्कों को उम्मीद है कि 2021 में जी-20 की बैठक भारत में हो सकती है।
नीति आयोग में हमने वह आशंकाएं गलत साबित की हैं, जिनमें राज्योंं से बातचीत खत्म होने का डर दिखाया गया था। यह संबंध अौर भी मजबूत हुए हैं। कई मुद्दों पर राज्योंं से निरंतर बातचीत होती है। आयोग भी राज्यों में जाकर बातचीत करता है। इसके बेहतर नतीजे सामने आए हैं। हां, विजन दस्तावेज और रणनीतिक मामले अभी पूरे होने बाकी हैं। उन पर काम तेजी से जारी है। मेरे केंद्रीय कैबिनेट में शामिल होने या अन्य जिम्मेदारी की बात निराधार है। शिक्षण क्षेत्र ही मेरा पहला प्यार है। हां, प्रधानमंत्री के न्यू इंडिया के निर्माण में मैं हमेशा भूमिका निभाने को तैयार रहूंगा। दो देशों की दूरी से संबंध कमजोर नहीं होगा। दिल से मैं हमेशा हिंदुस्तानी हूं और रहूंगा। जब भी प्रधानमंत्री चाहेंगे मैं सेवा देने को तैयार हूं।
–अरविंद पनगढ़िया
–अरविंद पनगढ़िया





