पटना हाईकोर्ट के जस्टिस राकेश कुमार को भी रखा गया न्यायिक कार्य से अलग…

पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अमरेश्वर प्रसाद शाही ने सोमवार को भी जस्टिस राकेश कुमार को काम से अलग रखा है। उनका नाम सोमवार को सुने जाने मामलों की दैनिक सूची में नहीं है। इसके पहले शनिवार को पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस व जस्टिस राकेश कुमार दिल्ली में थे। चर्चा इस बात की है कि दोनों को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने विवाद सुलझाने के लिए बुलाया है। चर्चा इस बात की भी है कि प्रधानमंत्री कार्यालय से जस्टिस राकेश कुमार एवं स्पेशल कोर्ट का वह फैसला मंगाया गया है, जिसे लेकर विवाद खड़ा हुआ है। 
विदित हो कि बुधवार को पटना हाई कोर्ट के जस्टिस राकेश कुमार ने न्यायपालिका पर तल्ख टिप्पणी की थी। उन्होंने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था- ‘भ्रष्टाचारियों को न्यायपालिका से भी संरक्षण मिलता है।’ यह भी कहा था- ‘जबसे न्यायाधीश पद की शपथ ली है, तब से देख रहा हूं कि सीनियर जज भी मुख्य न्यायाधीश के आगे पीछे घूमते हैं, ताकि उनसे ‘फेवर’ लिया जा सके।’ जस्टिस कुमार ने हाईकोर्ट में भ्रष्टाचार का मामला उठाकर उसकी जांच का भी आदेश दिया। उन्होंने आदेश की कॉपी, देश के चीफ जस्टिस, सीबीआइ और पीएमओ भेजने को कहा था।
उनकी इस टिप्पणी पर गुरुवार को पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा था, ‘ऐसा लगता है कि पूरे देश में वही सबसे ईमानदार जज हैं। संभव है कि वे व्यक्तिगत कारणों से क्षुब्ध हों, जिस कारण उन्होंने पूरी न्यायपालिका की गरिमा पर सवाल खड़ा कर दिया।’ इसके बाद पटना हाई कोर्ट की 11 न्यायाधीशों की एक बड़ी बेंच ने जस्टिस कुमार के कृत्य की भर्त्सना करते हुए उनके आदेश को निलंबित कर दिया। इसके बाद से उन्हें किसी एकल या डबल बेंच में शामिल नहीं किया जा रहा है।
इस प्रकरण पर जस्टिस राकेश कुमार ने कहा, ‘अगर भ्रष्टाचार को उजागर करना अपराध है, तो मैंने अपराध किया है।’ कहा कि उन्हें जो सही लगा, वही किया। वे अपने स्टैंड पर कायम हैं और किसी भी स्थिति में भ्रष्टाचार से समझौता नहीं करेंगे। कहा कि अगर चीफ जस्टिस उन्हें न्यायिक कार्य से अलग रखकर खुश हैं, तो यह उनका अधिकार है।
इस बीच बिहार सरकार ( Bihar government) ने पुलिस मामलों पर एडवाइजरी बोर्ड का पुनर्गठन करते हुए जस्टिस राकेश कुमार को उसका अध्यक्ष बना दिया है। यह एडवाइजरी बोर्ड बिहार कंट्रोल ऑफ क्राइम एक्ट 1981, नेशनल सिक्युरिटी एक्ट 1980 और कंजर्वेशन ऑफ फॉरेन एक्सचेंज एंड प्रिवेंशन ऑफ स्मगलिंग एक्टिविटी एक्ट 1974 से जुड़े मामलों पर सरकार को सलाह देता है।





