नोटबंदी: 30 दिसम्बर के बाद, अब आएगी बैंकरों की शामत

देश में जारी नोटबंदी की प्रक्रिया 30 दिसम्बर को पूरी हो जाएगी। नोटबंदी के दौरान बैंकों से माध्यम से करीब 14 लाख करोड़ रुपए बदले जाएंगे। इसलिए तय है कि नोट बंदी के दौरान रुपए कहां से आए और कहां गए यह बैंकरों को अच्छी तरह पता है। अब सरकार उनसे यह जानना चाहेगी और यही बताने में बैंकरों की शामत आएगी।
रिजर्व बैंक देश में नई करेंसी जारी करती है। नोटबंदी के दौरान किस बैंक को कितनी करेंसी जारी की गई इस बात की जानकारी रिजर्व बैंक के पास है। इसके बाद बैंकों की जिम्मेदारी है कि उन्होंने अपने बैंक की किस शाखा को कितनी करेंसी दी। यानी हर बैंक की हर शाखा में नोट बंदी के दौरान कितनी करेंसी पहुंची यह जानकारी आधिकारिक रूप से रिजर्व बैंक को पता है।
अब बैंक की शाखाओं ने नोट बंदी के दौरान इस पैसे का क्या किया यह जानना कठिन नहीं है। बैंकरों ने अगर ईमानदारी से काम किया है तो उन्हें पूरा ब्योरा देने में दिक्कत नहीं है। लेकिन कई बैंकरों ने इसमें गोलमाल किया है। ऐसे बैंकरों को बताना ही होगा कि मिला पैसा कहां गया।
चूंकि यह जानकारी बैंकों के कंप्यूटरों और बैंकों के सर्वर पर हमेशा के लिए फीड हो गई है, इस लिए सरकार को भी जल्दी नहीं है। आयकर विभाग के पास कर्मचारियों की कमी है। ऐसे में वह यह जांच आगे करता रहेगा। और यह आगे जारी रहने वाली जांच बैंकरों को परेशान करेगी। कुछ बैंकरों का आगे तबादला हो जाएगा और कुछ रिटायर हो जाएंगे। लेकिन जब जांच होगी तो इन बैंकरों को आना पड़ेगा।
उस दौरान बैंकरों को तमाम जानकारी देने में पसीना छूटेगा, लेकिन जानकारी देनी ही पड़ेगी। रिजर्व बैंक के बैंकिंग विभाग के एक अधिकारी के अनुसार अगर जिन जिन बैंकरों ने गड़बड़ी की है उनका बचना कठिन है। अभी सरकार की प्राथमिकता बैंकिंग सामान्य करने की है, इसके बाद जांच में गड़बड़ करने वाले अपनी शामत समझें।





