नदी अभियान में ये बात आई सामने, नदियों के दोनों ओर 1 Km की चौड़ाई में सिर्फ…
भोपाल. हजारों वर्षों से हमारी नदियों ने भारत की पुण्य भूमि को पोषित किया है। नदी घाटी में ही भारत की महान सभ्यता और संस्कृति फली-फूली है। आज भारत की लगभग सभी नदियां इतनी तेजी से सूख रही हैं कि अगले 15 से 20 सालों में बारहों महीने बहने वाली नदियां मौसमी हो जाएंगी। अगर आप भारत के ऊपर हवाई यात्रा करें तो आपको पूरा देश रेगिस्तान की तरह नजर आएगा। 2030 तक हमें जरूरत का 50% पानी ही मिलेगा। गंगा विश्व की उन नदियों में है, जिनका अस्तित्व संकट में है। जो नदी लाखों साल से बह रही है, उसे हमने एक पीढ़ी में नष्ट कर दिया। समय आ गया है कि हम नदियों के दोहन के बजाय उनमें जान फूंकने के तरीकों के बारे में सोचें।

नदियों को बचाने के उपाय…
– इसका कारगर उपाय यह है कि नदियों के दोनों ओर 1 किमी की चौड़ाई में सिर्फ पेड़ लगाएं। सरकारी जमीन है, तो जंगल लगाएं और किसानों की जमीन है तो फलों व औषधियों के पेड़ लगाएं।
– इससे हम किसानों की कमाई को, चार से छह सालों के अंदर, तीन से आठ गुना बढ़ा सकते हैं।
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1. नदी किनारे पेड़ लगाना इसमें कैसे मदद करेगा?
– बरिश होने पर पेड़ों की जड़ें पानी सोख लेती हैं और धरती में पानी जमा हो जाता है। यह पानी जमीन के अंदर रिस-रिसकर नदी में पहुंचता है और नदी में बारहों महीने पानी बहता रहता है।
– पेड़ों की जड़ें मिट्टी को छेददार बनाती हैं, जिससे कि बारिश होने पर वो पानी को सोख सकती है। अगर पेड़ नहीं होंगे, तो जमीन बारिश के पानी को नहीं सोख सकती।
– जब जमीन पानी को नहीं सोखती तो मानसून के समय पानी जमीन के ऊपर बहेगा और फिर बाढ़ आएगी और गर्मी में सूखा पड़ेगा।
2. आप योगदान कैसे दे सकते हैं?
– अगर सरकार ऐसी नीति बनाती है, जिसके दूरगामी परिणाम होने वाले हैं, तो हमें दिखाना होगा कि हम उसके साथ हैं। आप मिस्ड कॉल से समर्थन दे सकते हैं।
– मैं चाहता हूं कि करोड़ों लोग मिस्ड कॉल देकर सरकार को बताएं कि हम इस तरह की नीति के लिए तैयार हैं।
– नदी अभियान जन जागरूकता कार्यक्रम 1 सितंबर को पूरे भारत में 60 से अधिक शहरों में आयोजित होगा।
– लाखों लोग, नदी अभियान टी-शर्ट, प्लेकार्ड, हेडगीयर और स्टिकर के साथ अपने शहरों के लोकप्रिय स्थानों पर खड़े होंगे।
– मैं चाहता हूं कि सुबह 8 से 11 बजे तक 3 घंटे के लिए लाखों लोग अपनी जिम्मेदारी प्रदर्शित करें कि हम भावी पीढ़ियों के लिए सही काम करने को तैयार हैं, लेकिन आपको बड़ी संख्या में एक साथ खड़ा नहीं होना है। आपको अकेले खड़ा होना है।
– आप कम से कम 50 फीट की दूरी पर खड़े हों, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग विरोध प्रदर्शन करते हैं। यह कोई विरोध प्रदर्शन नहीं है।
– व्यक्तिगत तौर पर आपको अपनी ज़िम्मेदारी को व्यक्त करना होगा। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हम में से हर इंसान 1 सितंबर को खड़ा होकर अभियान में हिस्सा ले।
– समय आ गया है कि हम अपनी नदियों में जान फूंकने के लिए कदम उठाएं, क्योंकि हमारे देश की महानता इसकी महान नदियों पर निर्भर करती है।
नदी अभियान क्या है?
हम सितंबर में नदियों के लिए अभियान शुरू कर रहे हैं। मैं खुद गाड़ी चलाकर 16 राज्यों से होते हुए, कन्याकुमारी से हिमालय तक जाऊंगा। हमें लोगों में ये जागरूकता फैलाना है कि हमारी नदियां तेजी से सूख रही हैं। नदी अभियान रैली 2 अक्टूबर को दिल्ली में समाप्त होगी। जहां ‘नदियों के पुनर्जीवन की सिफारिश का दस्तावेज’ केंद्र सरकार को पेश किया जाएगा।





