देश में नोटबंदी के छह महीने बाद आरबीआई का बड़ा बयान सार्वजनिक नहीं कर सकते….

नई दिल्ली। पीएम मोदी ने पिछले साल आठ नवंबर को देश में नोटबंदी लागू की थी। इससे देश की जनता को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। वहीं आरबीआई ने ठीक छह महीने बाद नोटबंदी पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। आरबीआई ने कहा है कि नोटबंदी की प्रक्रिया का ब्योरा नहीं दिया जा सकता। इससे देश की अर्थव्यवस्था को खतरा हो सकता है।
सरकार बोली, देश में नोटबंदी लागू करने से हुआ था फायदा
सूचना के अधिकार के तहत दाखिल एक आवेदन पर केंद्रीय बैंक ने कहा कि नोटबंदी की प्रक्रिया का विवरण बताने से भारत सरकार की भावी आर्थिक या वित्तीय नीतियों की रास्ते में बाधाएं आ सकती हैं। आरबीआई से उसके कार्यालय में हुई उन बैठकों के ब्योरे की प्रति मांगी गई थी, जिनमें 500 और 1000 रुपए के नोटों को बंद करने का निर्णय लिया गया था।
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संवेदनशील मामला है
उससे नोटबंदी के मुद्दे पर प्रधानमंत्री कार्यालय एवं वित्त मंत्रालय के साथ हुए पत्र व्यवहार की प्रति भी मांगी गई थी। आरबीआई ने आरटीआई आवेदन के जवाब में कहा, आवेदन में मांगी गई सूचना में 500 और 1000 रुपए के नोटों को वापस लेने की प्रक्रिया के पूरा होने से पहले की संवेदनशील पृष्ठभूमि की जानकरी भी मांगी गई है, जिसमें इस प्रक्रिया से संबंधित राय, आंकड़े, अध्ययन-सर्वेक्षण आदि शामिल हैं। उसने कहा, ऐसी सूचना का खुलासा, ऐसे फैसले लेने के उद्देश्य की दृष्टि से देश के आर्थिक हितों के लिए नुकसानदेह होगा। आरबीआई ने कहा कि इस तरह के विवरण देने से भारत सरकार की भावी आर्थिक या वित्तीय नीतियों के रास्ते में बाधा आ सकती है। अतएव संबंधित सूचना सूचना के अधिकार कानून की धारा आठ (1) के तहत इस तरह की सूचना न देने की छूट के अंतर्गत आती है।





