देश के सबसे चतुर नेता सुजान पवार, अब शिवसेना वाली जगह पर बनाये हुए हैं पैनी नजर

देश के सबसे चतुर सुजान नेताओं में शरद पवार का नाम सबसे ऊपर रखा जा सकता है। कांग्रेस से अलग होकर उन्होंने जब अपनी पार्टी बनाई तब से वे तीन साल पहले तक लगातार सत्ता में रहे थे। कांग्रेस से अलग होने वाले दूसरे नेताओं को सत्ता के लिए इंतजार करना पड़ा है। ममता बनर्जी को 12साल लग गए थे और जगन मोहन रेड्डी या जीके वासन अब भी इंतजार कर रहे हैं। पर पवार जिस साल अलग हुए उसी साल अपनी पार्टी का तालमेल कांग्रेस से कर दिया और महाराष्ट्र की सत्ता में आ गए। देश के सबसे चतुर नेता सुजान पवार, अब शिवसेना वाली जगह पर बनाये हुए हैं पैनी नजर

उनको जानने वाले मानते हैं कि वे सत्ता से दूर नहीं रह सकते हैं। तभी महाराष्ट्र में यह चर्चा है कि क्या वे राज्य सरकार में शिवसेना वाली जगह लेना चाहते हैं। पिछले दिनों शिवसेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने उनसे मुलाकात की थी। पवार ने इसका खुलासा कर दिया है। उन्होंने कहा है कि ठाकरे उनसे पूछ रहे थे कि अगर शिवसेना ने भाजपा से समर्थन वापस लिया तो एनसीपी क्या करेगी।

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इस सवाल के जवाब में पवार और उनकी पार्टी दो अलग अलग बातें कह रही है। पवार ने उद्धव ठाकरे से कहा कि पहले शिवसेना समर्थन वापस ले या अपना स्टैंड स्पष्ट करे तब एनसीपी भी अपने पत्ते खोलेगी। दूसरी ओर उनकी पार्टी ने कहा है कि अगर शिवसेना ने समर्थन वापस लिया तो एनसीपी सरकार का समर्थन नहीं करेगी। पर पार्टी की इस बात पर किसी को यकीन नहीं है क्योंकि 2014 के चुनाव के बाद एनसीपी ने ही बाहर से बिना शर्त समर्थन देकर भाजपा की सरकार बनवाई थी।

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तभी महाराष्ट्र की राजनीति के जानकार सूत्रों का कहना है कि पवार बिल्कुल किनारे पर बैठे हैं। उनको भाजपा के साथ तालमेल करने में कोई दिक्कत नहीं है तो कांग्रेस और एनसीपी से भी गठजोड़ में दिक्कत नहीं है। वे आकलन कर रहे हैं कि ज्यादा फायदा किस तरफ है। अगर शिवसेना सरकार से बाहर होती है तो ज्यादा संभावना इस बात की है कि सरकार गिराने की बजाय पवार की पार्टी भाजपा को समर्थन दे दे। यह भी कहा जा रहा है कि इस बार संभव है कि एनसीपी सरकार में भी शामिल हो। ध्यान रहे गुजरात में राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा की बिल्कुल आमने सामने की लड़ाई में पवार की पार्टी ने कांग्रेस के अहमद पटेल को हरवाने के लिए वोट किया था। तभी से उनके प्रति कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों में भरोसा कम हुआ है।

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