दुष्कर्म पीड़ि‍ता के लिए तकलीफदेह बन गया सिस्टम, दून महिला अस्पताल भी कठघरे में है

जौनपुर की दुष्कर्म पीड़ि‍ता नाबालिग के लिए अब की परिस्थितियां कहीं ज्यादा तकलीफदेह साबित हो रही हैं। इस हृदय विदारक घटना के साथ ही उसे संवेदनहीन सिस्टम का भी सामना करना पड़ा है। अस्पताल का तज़ुर्बा भी पीड़ि‍ता के लिए कम त्रासदीपूर्ण नहीं है। बच्ची की तबीयत बिगड़ने के बाद दून महिला अस्पताल भी कठघरे में है। सवाल यह कि बच्ची को डिस्चार्ज करने में अस्पताल प्रशासन ने जल्दबाजी क्यों दिखाई। रविवार को बच्ची को जब दोबारा अस्पताल लाया गया, तब भी अफसर व चिकित्सक हरकत में नहीं आए। उन्होंने करीब दो घंटे इंतजार कराया।

शुक्रवार देररात टिहरी की पुलिस बच्ची को परिजनों के साथ दून महिला अस्पताल में मेडिकल परीक्षण के लिए लाई थी, लेकिन उसे शनिवार को ही डिस्चार्ज कर दिया गया। परिजनों ने तब भी बिना बताए पुलिस पर बच्ची और उसकी मां को यहां से ले जाने का आरोप लगाया था। अब बच्ची की तबीयत बिगड़ने पर यह सवाल उठ रहा है कि अस्पताल में उसका सही से उपचार क्यों नहीं किया गया। इन हालात में उसे बयान दर्ज करने के लिए कई किलोमीटर ले जाया गया।

इस कारण उसकी तबीयत बिगड़ती चली गई। घटना के बाद से बच्ची सदमे में है। पर सिस्टम की संवेदनहीनता देखिए कि रविवार को जब उसे पुन: अस्पताल लाया गया तो न कोई अधिकारी समय पर पहुंचा और न डॉक्टर। बच्ची के अल्ट्रासाउंड में भी देरी हुई। जिस कमरे में बच्ची को रख गया, वहां भयंकर गर्मी थी। बार-बार इस ओर ध्यान दिलाने पर अस्पताल प्रशासन ने कूलर का इंतजाम किया। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना का कहना है कि उन्होंने चिकित्सकों से इस विषय में जानकारी ली है। बताया गया कि बच्ची को जिस वक्त डिस्चार्ज किया गया उसकी तबीयत ठीक थी। फिर भी हर पहलू की जांच कराई जा रही है।

निजता में भी खलल 

दुष्कर्म पीड़ि‍ता नाबालिग को कई स्तर पर जूझना पड़ रहा है। अस्पताल में उसे व उसके परिजनों से मिलने दिनभर कोई न कोई पहुंच रहा है। जिससे न केवल उसकी निजता में खलल पड़ रहा है, बल्कि उसे घटना से उबर पाने में भी तकलीफ हो रही है। स्थिति यह कि सोमवार को अधिकांश वक्त लोग उसे घेरकर खड़े रहे। अपने आसपास इतनी भीड़ देख बच्ची और भी ज्यादा घबरा गई है।

किन परिस्थिति में डिस्चार्ज हुई बच्ची, होगी जांच

बाल विकास एवं महिला सशक्तिकरण राज्यमंत्री रेखा आर्य ने सोमवार को दून महिला अस्पताल में भर्ती दुष्कर्म पीडि़त बच्ची और उसके परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने बच्ची एवं उसकी मां से अलग-अलग बात कर घटना की जानकारी ली।

प्रथम तल पर जिस कमरे में दुष्कर्म पीडि़त बच्ची को भर्ती किया गया हैं, उसमें बेहताशा गर्मी देखकर राज्यमंत्री का पारा चढ़ गया। उन्होंने मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एसके गुप्ता, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा को तत्काल बच्ची को प्राइवेट वार्ड में शिफ्ट करने के निर्देश दिए। परिजनों ने उनसे अस्पताल के चिकित्सकों पर इलाज में लापरवाही एवं पुलिस के दबाव में बिना उपचार डिस्चार्ज करने का भी आरोप लगाया। जिस पर मंत्री ने चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा एवं सीएमएस डॉ. मीनाक्षी जोशी को इसकी जांच कर रिपोर्ट देने को कहा। वहीं, उन्होंने रविवार रात को अफसरों के अस्पताल न पहुंचने और चिकित्सकों के देरी से पहुंचने पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा निदेशक को इस पर कार्रवाई को कहा है।

उधर, पूर्व राज्यसभा सदस्य तरुण विजय, कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह, विधायक खजानदास समेत कई अन्य लोगों ने भी बच्ची और परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। कहा कि अस्पताल से बच्ची को कैसे डिस्चार्ज किया गया, इसकी भी जांच होनी चाहिए। वहीं, पुलिस के पीडि़ता और उसकी मां को एक ही गाड़ी में टिहरी ले जाने को भी उन्होंने गलत बताया। प्रीतम सिंह ने ऐसे पुलिस कर्मियों एवं चिकित्सकों पर कठोर कार्रवाई की मांग की। वहीं, विधायक खजानदास ने कहा कि सरकार हर पहलू की जांच करा रही है।

पीड़ि‍ता के वार्ड में लगाया कूलर

पीड़ि‍ता को जिस वार्ड में भर्ती किया गया है, वहां ज्यादा गर्मी है। इसके अलावा दिनभर कोई न कोई उसे मिलने पहुंच रहा है। ऐसे में उसे प्राइवेट वार्ड में शिफ्ट करने की बात कही गई। पर वर्तमान समय में अस्पताल में प्राइवेट वार्ड नहीं है। ऐसे में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा ने अपने स्तर पर पहल की। वह खुद से बाजार जाकर कूलर खरीदकर लाए और इसे पीड़ि‍ता के वार्ड में लगा दिया गया है।

टिहरी प्रकरण में पोक्सो एक्ट की उड़ाई धज्जियां

टिहरी प्रकरण में पोक्सो एक्ट मजाक बनकर रह गया। पुलिस ने न सिर्फ पीड़ि‍ता को आरोपित के साथ चार घंटे का सफर कराया, बल्कि उसे सुरक्षित माहौल देने में भी पुलिस नाकाम रही। कानून के जानकार बताते हैं कि पोक्सो एक्ट में पीड़ि‍त नाबालिग के साथ बेहद सौम्य व्यवहार करने का निर्देश दिए गए हैं। उसे ऐसा माहौल दिया जाना बेहद जरूरी होता है कि उसके साथ हुई घटना का दूरगामी असर उसके मन-मस्तिष्क पर न पड़े और वह बेहतर जिंदगी जीने की दिशा में आसानी से कदम बढ़ा सके।

सरकारी अधिवक्ता भरत सिंह नेगी का कहना है कि प्रोटेक्शन ऑफ चिल्डे्रन फ्रॉम सेक्सुअल अफेंसेज एक्ट यानी लैंगिक उत्पीडऩ से बच्चों के सरंक्षण का अधिनियम में पीड़ि‍ता को कई अधिकार दिए गए हैं। पहला तो यह है कि अपराध के बाद उन्हें ऐसा माहौल दिए जाना होता है, ताकि वे खुद को सुरक्षित महसूस करे। टिहरी प्रकरण में यह बात सामने आई कि पीड़ि‍ता और आरोपित को एक ही गाड़ी से कैम्पटी से नई टिहरी ले जाया गया। यह व्यवहारिक तौर पर भी अनुचित था।  पोक्सो एक्ट के तहत तो पहले से ही इसे लेकर दिशा-निर्देश जारी हो रखे हैं। जिसका हर पुलिस कर्मी को बेहद संवेदनशील होकर पालन करना आवश्यक होता है।

पोक्सो एक्ट में पीड़ि‍त किशोर-किशोरी के अधिकार

  • सूचना पर पीड़ि‍त के पास जाने वाला पुलिस कर्मी सादी वेश में होगा। वह पुलिस की वर्दी में नहीं होगा
  • पुलिस को उसकी मनोभावना को समझ कर बेहद सौम्य और सरल भाषा में बात करनी होगी।
  • किशोरी के मामले में महिला पुलिस कर्मी का साथ होना आवश्यक होता है। वही उससे पूछताछ कर सकती है।
  • पीड़ि‍त और आरोपित का किसी भी परिस्थिति में आमना-सामना नहीं होना चाहिए। इससे उसके मन में भय व्याप्त हो सकता है।
  • जितनी जल्दी हो सके पीड़ि‍त को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करना होता है। विलंब से वह कई बातों को भूल सकती है।
  • पीड़ि‍त या पीड़ि‍ता यदि घायल है तो प्राथमिकता के आधार पर उसे पहले उपचार दिलाया जाएगा। इसके बाद बयान होंगे।
  • आरोपित की शिनाख्त के दौरान भी पीडि़त को ऐसी जगह से आरोपित को दिखाया जाना चाहिए, जहां से आरोपित उसे देख न सके।

फांसी तक की सजा का प्रावधान

सरकारी अधिवक्ता भरत सिंह नेगी ने बताया कि 12 साल से कम उम्र की बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को कम से कम 20 साल तक की सजा या आजीवन कारावास या फिर मौत की सजा का प्रावधान किया गया है। 12 साल की कम उम्र की बच्ची से गैंगरेप के दोषी को आजीवन कारावास या फिर मौत की सजा दिए जाने का प्रावधान है। दुष्कर्म के मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होती है। मामलों के ट्रायल को भी दो महीने में पूरा किए जाने के निर्देश हैं। निचली अदालत के फैसले के खिलाफ उच्च अदालत में अपील की समय सीमा छह महीने होती है। 12 साल से अधिक और 16 साल से कम उम्र की लड़की से दुष्कर्म या सामूहिक दुष्कर्म के मामलों में आरोपितों को अग्रिम जमानत देने का कोई प्रावधान नहीं है।

बोले न्यूरो साइकोलॉजिस्ट

डॉ. सोना कौशल ( न्यूरो साइकोलॉजिस्ट) का कहना है कि दुष्कर्म पीड़ि‍ता के मन पर घटना का काफी बुरा असर पड़ता है। यदि उसे भावनात्मक सहारा नहीं दिया गया तो वह पूरी जिंदगी घटना को नहीं भूल पाएगी। इसके लिए उनके साथ सौम्य व्यवहार की जरूरत होती है और उन्हें इस बात का अहसास दिलाया जाना भी जरूरी होता है कि वह पूरी तरह से सुरक्षित है और डरने की कोई जरूरत नहीं है। उसकी सही ढंग से काउंसिलिंग भी की जानी चाहिए। पोक्सो एक्ट के तहत भी इस तरह बातों को पूरी तरह से स्पष्ट किया गया है।

डीजीपी, डीएम और एसएसपी को एससी आयोग का नोटिस

टिहरी जनपद के जौनपुर इलाके में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले का राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने भी संज्ञान लिया है। आयोग ने प्रकरण में पुलिस महानिदेशक, जिलाधिकारी और एसएसपी टिहरी को नोटिस भेजा है। आयोग ने पूरे प्रकरण की जांच रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। मामले में लापरवाही बरतने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है।

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की सदस्य डॉ. स्वराज विद्वान ने बताया कि वे बुधवार को पीडि़ता के गांव जाकर उसके परिजनों से मुलाकात कर अब तक हुई कानूनी कार्रवाई की जानकारी लेगी। उन्होंने बताया कि इस प्रकरण की विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं। इस मामले में राज्य के पुलिस महानिदेशक, टिहरी जिले के जिलाधिकारी और एसएसपी को नोटिस जारी कर पूरी स्थिति के बारे में रिपोर्ट देने को कहा गया है। 24 घंटे के भीतर पूरे मामले की जांच रिपोर्ट न देने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने कहा कि जौनपुर क्षेत्र में अनुसूचित जाति के लोगों के साथ बढ़ रही उत्पीडऩ की घटनाएं चिंता का विषय है। इस संबंध में आयोग की सदस्य ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के निदेशक कौशल कुमार को जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। ताकि वास्तविक स्थित सामने आ सके।

अधिकारियों के साथ आठ को करेंगी  बैठक

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की सदस्य डॉ.स्वराज विद्वान पांच जून को 11 बजे पत्रकार वार्ता करेंगी। इसके बाद पीड़ि‍ता के गांव पहुंचकर परिजनों का हाल जानेंगी। यहां से वे चिन्यालीसौड़ उत्तरकाशी के लिए रवाना होंगी। जहां दो दिन विभिन्न बैठकों में भाग लेंगी। इसके बाद आठ जून को दून में मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, आइजी, एसएसपी और जिलाधिकारी के साथ बैठक करेंगी। साथ ही वे दुष्कर्म पीड़ि‍ता और जितेंद्र दास हत्या प्रकरण की अपडेट जानकारी लेंगी।

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