दुनिया के टॉप 50 देशों में शामिल हो सकता है भारत, इनोवेशन के मामले में

आज बुधवार को वैश्विक नवोन्मेषी सूचकांक (GII) 2019 जारी होने जा रहा है। इस बार भारत वैश्विक नवोन्मेषी सूचकांक (ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स-जीआईआई) की मेजबानी कर रहा है। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) और विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) इस कार्यक्रम की सह-मेजबानी कर रहे हैं। जीआईआई रिपोर्ट की लॉचिंग आज नई दिल्ली में रेलवे और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और WIPO के महानिदेशक फ्रांसिस गैरी द्वारा की जाएगी। ऐसा माना जा रहा है कि भारत इस बार इनोवेशन के मामले में दुनिया के टॉप 50 देशों में शुमार हो सकता है।     

                                                                                                                                                                                    भारत की रैंकिंग में लगातार हो रहा सुधार
जीआईआई सूचकांक में भारत की रैंकिंग में लगातार सुधार हो रहा है। साल 2015 में वैश्विक नवोन्मेषी सूचकांक में भारत 81 वें स्थान पर था। इसके बाद 2016 में भारत 66 वें स्थान पर, 2017 में 60 वें स्थान पर और 2018 में 57 वें स्थान पर आ गया।

इस तरह इनोवेशन के मामले में भारत की वैश्विक रैंकिंग में सुधार लगातार जारी है।वैश्विक नवोन्मेषी सूचकांक को संयुक्त रूप से कार्नेल विश्वविद्यालय, आईएनएसईएडी और संयुक्त राष्ट्र संघ के विश्व बौद्धिक संपदा संगठन द्वारा तैयार किया जाता है। इस सूचकांक में 80 संकेतकों के आधार पर 126 देशों का आंकलन किया जाता है।

विभिन्न मानदंडों में भारत की रैंकिंग में है भारी अंतर
वैश्विक नवोन्मेषी सूचकांक 2018 की रिपोर्ट की बात करें, तो इसमें सूचकांक के विभिन्न मानदंडों में भारत की रैंकिंग में काफी अंतर देखने को मिला था। साल 2018 में बाजार सुगमता के मामले में भारत की वैश्विक रैंकिंग में 36 वें पायदान पर, ज्ञान और तकनीक उत्पादन में 43 वें स्थान पर, मानव पूंजी व शोध के मामले में 56 वें स्थान पर, कारोबारी सहजता के मामले में 64 वें स्थान पर, रचनात्मक उत्पादन के मामले में 75 वें स्थान पर, बुनियादी ढांचे के मामले में 77 वें स्थान पर और संस्थान के मामले में 80 वें स्थान पर रहा।

इस साल भारत के जीआईआई रैंकिंग में टॉप 50 देशों में शामिल होने की उम्मीद की जा रही है। इसके पीछे सरकार द्वारा डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप और कारोबारी सुगमता के लिए इनोवेशन को बढ़ावा देना बड़ा कारण बताया जा रहा है।

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