दीपावली कैसे मनाएं… जानें दीवाली मनाने का असली सही तरीका

उज्जवलप्रभात डेस्क, लखनऊ. दीवाली 5 दिन का त्यौहार है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है | यह कई देशों में जैसे भारत, सिंगापुर, मलेशिया और नेपाल या जहाँ विशाल भारतीय समुदाय निवास करता है जैसे कनाडा, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका और न्यूज़ीलैण्ड में हर साल मध्य अक्टूबर से मध्य नवम्बर के बीच एक ख़ास दिन मनाया जाता है |

जिस प्रकार क्रिस्चियन लोगों के लिए क्रिसमस एक ख़ास और महत्वपूर्ण उत्सव ही उसी प्रकार दीवाली का त्यौहार हिन्दुओं के लिए बहुत मायने रखता है | हिन्दुओं के अलावा इस त्यौहार को अन्य धर्मों के लोग जैसे बौद्ध, जैन और सिख भी मनाते हैं |
आप चाहे किसी भी धर्म के हों, आप भी इस उत्सव में शामिल हो सकते हैं जिसे “प्रकाश का उत्सव” कहते हैं |

आइये हम आप को बताते है कि दीपावली कैसे मनाया जाता है …
1. दीवाली क्या है ?
दिवाली को दीपावली भी कहते हैं, यहाँ “दीप” का मतलब है “प्रकाश या दीपक” और “अवली” का मतलब है “पंक्ति या कतार” |यह “प्रकाश की पंक्ति” दीवाली के समय हर जगह जगमगाते दीपों को दर्शाती है | दीवाली मनाने के पीछे के कारणों में विभिन्नता है और सुझावों के तहत बताये गये हैं | दीवाली में 3 से 5 दिन का उत्सव मनाया जाता है (और यह समय इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस जगह से आये हैं या उत्सव मनाने की आपकी परंपरा क्या है)|
- पूर्णिमा (फुल मून) से तेरहवें दिन धनत्रयोदशी या धनतेरस होती है | यह दीवाली के उत्सव का पहला दिन होता है | “धन” का मतलब है “संपत्ति या लक्ष्मी” और तेरस का मतलब है “तेरहवा दिन”| यह संपत्ति या धन की देवी माँ लक्ष्मी के लिए उत्सव मनाने का दिन है | भारत में कुछ जगहों पर मृत्यु के देवता प्रभु यमराज के लिए दीपक जलाकर रखे जाते हैं |
- चौदहवें दिन छोटी दीवाली या नरक चतुर्दशी होती है | हिन्दुओं का विश्वास है कि इस दिन भगवान कृष्ण ने संसार को भय से मुक्त करने के लिए नरकासुर नाम के राक्षस का वध किया था | अधिकतर इस दिन भी पटाखे छोड़े जाते हैं |
- पूर्णिमा का दिन दीवाली या लक्ष्मीपूजा या लक्ष्मीपूजन का दिन होता है और यह दिन आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष में आता है | यही दिन दीवाली का वास्तविक और सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण दिन है | अगर घर पहले से साफ़ नहीं किये गये होते है तो इस दिनस देवी लक्ष्मी के स्वागत के लिए सुबह ही साफ़-सफाई कर लेना चाहिए | दोस्तों और परिवार के बीच में प्रेम के बंधन को मज़बूत करने के लिए इस दिन उपहार और मिठाइयों का आदान-प्रदान किया जाता है | रात्रि भोजन के बाद पटाखे चलाये जाते हैं |
- कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष का पहला दिन बलिप्रतिपदा या पड़वा या गोवर्धन पूजा या वर्षप्रतिपदा का दिन होता है | इस दिन भगवान कृष्ण ने इंद्र के कोप से गोकुल वासियों को बचाने के लिए गोवेर्धन पर्वत को उठाया था और इसी दिन राजा विक्रमादित्य का राज्याभिषेक हुआ था |
- दिवाली के उत्सव का पांचवा और आखिरी दिन भाई दूज या भैया दूज का होता है | दिवाली के आखिरी दिन भाई और बहन के प्रेम के नवीकरण का दिन है जिसमे बहनें अपने भाई के माथे पर पवित्र लाल तिलक लगाती हैं और उनकी लम्बी उम्र के लिए प्रार्थना करती हैं, जबकि भाई अपनी बहनों को आशीर्वाद और प्यार का तोहफा देते हैं |
- दीवाली के पूर्व तेहरवे दिन आने वाले एक अलग पवित्र त्यौहार वसुबारस (vasubaras) और भौबिज (bhaubij) में प्रत्येक व्यक्ति शामिल नहीं होता और फिर क्रम से सभी दीवाली के त्यौहार का अनुकरण करते हैं |
२. शॉपिंग करने जाएँ:
दीवाली के पहले दिन अर्थात् धनतेरस के दिन बर्तन और आभूषण खरीदने का रिवाज है |
दीवाली के पहले दिन धनतेरस के पहले ही घर और व्यवसायिक स्थल की अच्छी तरह से सफाई करें :
कपडे धोएं, सभी कमरे साफ़ करें और अपने घर और व्यायसायिक स्थल दोना जगह के बही खाते या हिसाब-किताब पूरे करें | यह बरसात के कारण होने वाली गंदगी की सफाई करने के समान है, यह “सफाई वाली” रीति से आप खुद को वातावरण में उपस्थित किसी भी तरह के अनावश्यक तत्वों से मुक्त करते हैं |
- चावल के आटे और सिन्दूर से अपने घर में चरणों के चिन्ह बनायें जो दर्शाता है कि आप देवी लक्ष्मी के आने का इंतज़ार कर रहे हैं |

3. अपने घर या व्यावसायिक स्थल के मुख्य द्वार को पारंपरिक बनावट की रंगोली की डिजाईन से रंग-बिरंगा बनायें और सजाएँ:
इसमें शामिल हैं-घंटियाँ, फूलों की माला, बन्दनवार, दर्पण, एलईडी लाइट्स आदि | धन और सम्पदा की देवी के स्वागत के लिए यह आनंददायक रास्ता अपनाएं | रंगोली की डिजाईन इन्टरनेट पर खोजी जा सकती हैं या यहाँ दिए गये सुझावों से आप प्रेरित हो सकते हैं |
विभिन्न प्रकार की रंगोली बनाने की कोशिश करें: बाज़ार में रेडीमेड लकड़ी की रंगोली उपलब्ध हैं |[४]इन्हें बहुत खूबसूरती के साथ हाथों से बनाया जाता है और लकड़ी के हल्के टुकड़ों पर पेंट किया जाता है | इन्हें व्यवस्थित करने के कई तरीके होते हैं इसलिए अपनी रचनात्मकता को साकार करें और खुद की डिजाईन निर्मित करें |
उत्सव के समय हर रात दीपक जलाएं: शाम के समय, छोटे-छोटे तेल के दीपक (जिन्हें “दीया” कहते हैं) जलाएं और इन्हें अपने घर के चारों ओर रखें | सभी लाइट्स जलाएं और कुछ मोमबत्तियां जलाएं | दीपक ज्ञान या आंतरिक प्रकाश के प्रतीक होते है जो आंतरिक शांति देते हैं और उपेक्षा और अंधकार के किसी भी निशान से लड़ने की शक्ति देते हैं |
4. कुछ पटाखे और फुलझड़ियाँ जलाएं:
ये दीवाली के सामान्य भाग हैं जो आपके चारों ओर पाई जाने वाली बुराई से आपको बचाने के प्रतीक के रूप में उपयोग किये जाते हैं | ये सामान्यतः दीवाली के वास्तविक दिन मतलब तीसरे दिन सबसे ज्यादा संख्या में चलाये जाते हैं |
- अगर आप अपने खुद के पटाखे सेट कर रहे हैं तो सावधान रहें और पटाखे उपयोग करने के साथ सभी सुरक्षा सावधानियों का पालन करें |
- शोर करने वाले पटाखों से सावधान रहें |
- पालतू जानवरों का ध्यान रखें और छोटे बच्चों को घर के अंदर और तेज़ तथा डरावने शोर से दूर रखें | अधिक जानकारी के लिए “पटाखे चलाते समय पालतू जानवरों का ध्यान रखें” लेख देखें |
5. दूसरे और तीसरे दिन नए कपडे और आभूषण पहनें:
अगर आप एक महिला हैं तो साडी पहन सकती हैं जो एक परम्परागत भारतीय परिधान हैं और इसे गरिमापूर्ण तरीके से कमर पर बांधकर बांये कंधे पर डाला जाता है | महिलाएं सलवार-कुर्ता भी पहन सकती हैं जिसमे ढीले-ढाले भारतीय अंगरखा या कुर्ते को मैचिंग की पैन्ट्स या लेग्गिंग्स और लंबे दुपट्टे या शाल या स्कार्फ़ के साथ पहना जाता है |
- पुरुष सामान्यतः कुर्ता पहनते हैं जो भारतीय पुरुषों के लिए राष्ट्रीय परिधान है | यह घुटनों तक लम्बा (सामान्यतः कढ़ाई युक्त) रेशम या कॉटन का अंगरखा होता है जिसे मैचिंग पैन्ट्स के साथ पहना जाता है |
6. मिठाइयाँ और नाश्ते बनायें:
ये दीवाली के लिए पारंपरिक चढ़ावे होते हैं और उपहार के रूप में भी दिए जाते हैं | कुछ सुझावों में शामिल हैं:
- रंगोली बनायें |
- बर्फी बनायें |
- कुल्फी बनायें |
- पोंगल बनायें |
- रसगुल्ला बनायें |
- जलेबी बनायें |
- गाजर का हलवा बनायें |
- अधिक सुझावों के लिए देखें: केटेगरी: भारतीय मिष्ठान्न |
7. शाकाहारी बनें:
कई भारतियों के लिए, दीवाली एक मांसाहार रहित त्यौहार है | इस त्यौहार में कोई निश्चित व्यंजन नहीं बनाये जाते इसलिए इनका चुनाव भिन्न-भिन्न हो सकता है लेकिन यह ज़रुरी है कि इसमें मिठाइयाँ शामिल हों, आख़िरकार दीवाली का त्यौहार मिठाइयों के बिना अधूरा है | दीवाली के समय बनाये जाने वाले भोजनों के लिए कुछ सुझाव “शाकाहारी भारतीय व्यंजन” की कैटेगरी में मिल सकते हैं |
8. लक्ष्मी पूजा करें:
यह धार्मिक क्रिया दीवाली के दिन (तीसरे दिन) धन की देवी लक्ष्मी, जो उन लोगों की मदद करती हैं जो धन पाने के लिए संघर्ष कर रहे है, से दैवीय आशीर्वाद पाने के लिए की जाती है | यह धार्मिक अनुष्ठान विस्तृत रूप से गेंहूँ, पत्तियां, सिक्के, और इस धर्मक्रिया के लिए तैयार की गयी मूर्ती का उपयोग करके की जाती है | इस अनुष्ठान के समय, वैदिक मन्त्रों के उच्चारण के द्वारा या दोनों ओर खड़े हाथियों के बीच उपस्थित सोने के सिक्के बरसाती देवी लक्ष्मी का ध्यान करके उनका नाम लेकर देवी लक्ष्मी का आह्वान किया जाता है | चढ़ावा या भोग बनाकर अंत में भोग लगाया जाता है | और सबसे अंत में, इस पूरे शांतिपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान के साथ इस धार्मिक वातावरण में आरती की जानी चाहिए |

9. सलाह
- इस त्यौहार का वर्णन करने के लिए कई नाम हैं: दीवाली, देवाली,दीपावली | यह केवल इस बात पर निर्भर करता है कि यह जश्न कहाँ मनाया जा रहा है और आप कहाँ से हैं | कई अंग्रेजी बोलने वाले देशों में जहाँ भारतीय लोग निवास करते हैं, इसे दीवाली कहते हैं |
- दीवाली पर खेले जाने वाले जुएँ के खेल के पीछे लीजेंड हैं देवी पार्वती जिन्होंने अपने पति भगवान शिव के साथ पांसे फेंककर खेला और ऐलान कर दिया कि जो कोई भी दीवाली की रात जुआ खेलेगा उसका आने वाले साल समृद्ध होंगे |
- दीवाली को बड़े पैमाने पर मान्यता किया गया है:1999 में, पोप जॉन पॉल द्वितीय अपने माथे पर तिलक लगवाकर एक भारतीय गिरिजाघर में दीवाली के दिये जलाकर एक विशेष युहरिस्ट (ईसाइयों की प्रार्थना करने की रीति या eucharist) की थी | उनका भाषण दीपों के त्यौहार पर था | यू एस की मंत्रिपरिषद के सीनेट रेसोलुशन 299 ने भी दीवाली के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्त्व को पहचानकर 14 नवम्बर 2007 को सर्वसम्मति से पारित कर दिया था |
- दीवाली का महत्व जीवन के नवीकरण से है और इसीलिए नये प्रोजेक्ट या व्यवसाय की शुरुआत इन जश्न के दौरान करने पर भाग्यशाली समझा जाता है |
- यहाँ कुछ पृष्ठभूमिक ज्ञान दिया गया है कि दीवाली क्यों मनाई जाती है |
- उत्तर भारत में, लोग रावण का वध करके भगवान राम के अयोध्या वापस आने और भगवन राम के राज्याभिषेक का जश्न मानते हैं |
- गुजरात में, लोग धन की देवी लक्ष्मी को पूजते हैं | ऐसा माना जाता है कि लक्ष्मी अगर घर पर आती हैं तो आने वाले साल में समृद्धि लाती हैं और दीपकों जलाकर देवी लक्ष्मी को घर की ओर आकर्षित किया जाता है |
- बंगाल में काली अर्थात् काल की देवी को पूजा जाता है |
10. चेतावनी
- बच्चों के द्वारा पटाखे चलने पर किसी जिम्मेदार वयस्क को उन पर नज़र रखनी चाहिये |
- जुआ केवल मज़े के लिए खेलें, पर इसका मतलब ये नहीं है कि इसे खेलकर अपने सारे पैसे जुये में हार जाएँ |
- कुछ निश्चित जगहों, धर्मों, राज्यों और शहरों में पटाखों को चलाने पर पाबन्दी रखी गयी है क्योंकि इसे गैरकानूनी माना गया है इसलिए इन्हें खरीदने से पहले जांच कर लें |
- ऐसे स्थानों पर दिये न रखें जहाँ आग लगने की या बच्चों या पालतू जानवरों के पास जाने की सम्भावना हो |

११. चीजें जिनकी आपको आवश्यकता होगी
- दिये: तेल के दिये बनाने के लिए थोड़े से तेल को दिए में डालें और एक कॉटन की बत्ती (string) बनाकर इसे तेल में डुबोकर दिये में रखें और जलाएं |
- रंगोली के सामान
- पटाखे
- नए वस्त्र और आभूषण
- उपहार
- मिठाइयाँ
- वयस्कों को देने के लिए साडी





