दीपक मिश्रा का समर्थन नहीं किया होता तो सुप्रीम कोर्ट को काफी नुकसान हो जाता: SCBA अध्यक्ष

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने कहा कि हालात जस के तस बने रहते और यदि बार ने मिश्रा का समर्थन नहीं किया होता तो ‘‘संस्था (सुप्रीम कोर्ट) को भारी नुकसान हो जाता.
सुप्रीम कोर्ट बार असोसिएशन (एससीबीए) के अध्यक्ष विकास सिंह ने सोमवार को कहा कि भारत के मौजूदा चीफ जस्टिस (सीजेआई) दीपक मिश्रा कुछ परिस्थितियों के शिकार रहे और कुछ वकीलों ने इसका इस्तेमाल संस्था को नुकसान पहुंचाने के लिए किया.
चीफ जस्टिस मिश्रा के लिए एससीबीए की ओर से आयोजित विदाई समारोह में सिंह ने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण था कि जस्टिस मिश्रा कुछ परिस्थितियों के शिकार हो गए.’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि बार द्वारा संस्था का समर्थन करने के बजाय हम में से कुछ लोगों ने उस विपरीत परिस्थिति का इस्तेमाल इस संस्था को नुकसान पहुंचाने के लिए किया.’’
एससीबीए प्रमुख ने कहा कि यदि हालात जस के तस बने रहते और यदि बार ने मिश्रा का समर्थन नहीं किया होता तो ‘‘संस्था (सुप्रीम कोर्ट) को भारी नुकसान हो जाता.’’
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और कुछ मेडिकल कॉलेजों से जुड़े मुकदमों पर विवाद के बारे में एससीबीए अध्यक्ष ने कहा कि उनकी ओर से लिखे गए खुले पत्र का मकसद सीजेआई मिश्रा का समर्थन करना नहीं बल्कि देश के सामने सच को लाना और यह सुनिश्चित करना था कि सुप्रीम कोर्ट की गरिमा को ठेस नहीं पहुंचे. इन मुकदमों के वकीलों में विकास सिंह भी शामिल थे.
विकास सिंह ने कहा, ‘‘एक आरोप की चर्चा जोरों पर थी. एक खास मामले से जुड़ी इस चीज को अखबार भी छाप रहे थे. मैं बार का अध्यक्ष था, लेकिन एमसीआई का वकील भी था जिसके खिलाफ वह आदेश प्राप्त करने की योजना थी.’’ उन्होंने कहा कि कुछ काफी ऊंचे ओहदे वाले लोगों द्वारा भी आरोप लगाए गए. लेकिन किसी ने उनका नजरिया नहीं पूछा, क्योंकि आखिरकार एक आदेश पारित किया जाना था. मेरे मुवक्किल के खिलाफ आदेश पारित किया जाना था.’’
सिंह ने कहा, ‘‘खुली अदालत में लिखवाए गए आदेश के बारे में कहा गया कि उसे कुछ लोगों के इशारे पर बाद में बदलवाया गया. आठ अलग-अलग मामलों में जब ऐसे ही आदेश पारित किए गए तो उसी दिन तीन जज मिलकर उन मामलों की समीक्षा तीन सदस्यीय पीठ में कर सकते थे.’’
जस्टिस मिश्रा और नए सीजेआई नियुक्त किए गए रंजन गोगोई की मौजूदगी में सिंह ने कहा, ‘‘यह संदेह भी जताया गया कि आदेश खुली अदालत में लिखवाया गया कि नहीं और वह भी आरोप का हिस्सा था.’’
सिंह ने कहा कि एमसीआई के वकील के तौर पर, न कि बार के अध्यक्ष के तौर पर, उन्हें लगा कि यह देखना उनकी जिम्मेदारी थी कि इस संस्था को नुकसान नहीं पहुंचे.

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