दिल्ली उच्च न्यायालय ने नवलखा को नजरबंदी से मुक्त किया

नई दिल्ली :दिल्ली उच्च न्यायालय ने गौतम नवलखा को नजरबंदी से सोमवार को मुक्त कर दिया। महराष्ट्र में हुई कोरेगांव – भीमा हिंसा के सिलसिले में उन्हें चार अन्य कार्यकर्ताओं के साथ पांच हफ्ते पहले गिरफ्तार किया गया था। नवलखा को राहत देते हुए उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के ट्रांजिट रिमांड आदेश को भी रद्द कर दिया। उन्होंने मामले को शीर्ष न्यायालय में ले जाने से पहले इस आदेश को चुनौती दी थी।
न्यायमूर्ति एस मुरलीधर और न्यायमूर्ति विनोद गोयल की पीठ ने कहा कि शीर्ष न्यायालय ने नजरबंदी चार हफ्ते के लिए बढ़ाई थी ताकि कार्यकर्ता उपयुक्त कानूनी उपाय का सहारा ले सकें और यह विस्तार सीमित उद्देश्य के लिए था तथा नवलखा ने इसका उपयोग किया।
उच्च न्यायालय ने कहा कि नवलखा को 24 घंटे से अधिक हिरासत में रखा गया, जिसे वैध नहीं ठहराया जा सकता। व्यक्ति को संविधान के प्रावधानों के तहत गिरफ्तारी का आधार बताना होता है। पीठ ने इस बात का जिक्र किया कि निचली अदालत के आदेश में ऐसा कोई संकेत नहीं है कि उसने जांच अधिकारी को केस डायरी दिखाने को कहा या केस डायरी देखी। पीठ ने कहा कि निचली अदालत के आदेश को वैध नहीं ठहराया जा सकता।
उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार की यह दलील स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि उनकी नजरबंदी दो दिन के लिए बढ़ाई जाए क्योंकि शीर्ष न्यायालय ने पिछले हफ्ते अपने फैसले में इसे चार हफ्तों के लिए बढ़ा दिया था। अदालत ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने इस बात की अनदेखी की कि गिरफ्तार किए गए





