तो इसलिए परशुराम ने काटा था अपनी ही माँ और भाइयों का सिर, ये थी बड़ी वजह…

आइए जानते हैं कि क्यों काटा था भगवान परशुराम ने अपनी माता का सिर?
भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से छठा अवतार था परशुराम जो वामन एवं रामचंद्र के मध्य में गिने जाते हैं. दुर्वासा की भांति परशुराम भी अपने क्रोधी स्वभाव के लिए विख्यात है. एक बार कर्त्वीरे ने परशुराम की अनुपस्थिति में आश्रम उजाड़ डाला था जिससे परशुराम ने क्रोधित होकर उसकी सहस्त्र भुजाओं को काट डाला था. कर्त्वीरे के संबंधियों ने प्रतिशोध की भावना से ऋषि जमदग्नि का वध कर दिया, क्रोधित होकर परशुराम ने 21 बार पृथ्वी को छत्रिय विहीन किया और 5 जिलों को खून से भर दिया था.
एक बार की बात है परशुराम की मां माता रेणुका पानी लाने के लिए नदी पर गई, नदी पहुंचने पर पानी में खेल रहे एक खूबसूरत राजकुमार को देखकर आकर्षित हो गई यह देखकर उनका मन विचलित हो गया, नदी पर राजकुमार को निहारते हुए उन्होंने बहुत समय खो दिया और भूल गई उनका पति उनकी वापसी का इंतजार कर रहा था.
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इस अवस्था में जब उन्होंने आश्रम में प्रवेश किया तो महर्षि जमदग्नि ने अपनी ध्यान शक्ति से यह बात जान ली और अपने बड़े बेटे को अपनी मां को मारने का आदेश दिया लेकिन उसने मोह में ऐसा नहीं किया. महर्षि जमदग्नि ने अपने सभी बेटों से बारी-बारी अपनी मां का वध करने को कहा, बेटों को यह समझ नहीं आ रहा था कि क्या करना उचित है? वैदिक संस्कृति में किसी भी महिला की मृत्यु एक भयानक पाप है और यहां तो अपनी ही माता की हत्या की बात थी. दूसरी ओर पिता के आदेश की अवहेलना करना भी एक बड़ा अपराध है, जब ऋषि के बड़ेबेटों ने पिता का यह आदेश मानने से इंकार कर दिया तो ऋषि ने अपने सबसे छोटे बेटे परशुराम को अपनी माता और अवज्ञाकारी भाइयों को मारने का निर्देश दिया.
परशुराम ने अपने पिता की शक्ति के बारे में सोचा की अगर उन्होंने अपने पिता के आदेश का पालन करने से इंकार कर दिया तो उन्हें श्राप दिया जाएगा लेकिन अगर उन्होंने आदेश का पालन किया तो उनके पिता प्रसन्न होंगे और उन्हें मुंह मांगा वरदान देंगे तब वो अपनी माँ और भाइयों को जीवन में वापस लाने में सक्षम होंगे इसलिए परशुराम ने अपनी मां और भाइयों को मार डाला. महर्षि जमदग्नि बहुत प्रसन्न हुए और परशुराम को वर मांगने के लिए कहा. परशुराम ने अपने पिता से माता रेणुका और चारों भाइयों को पुनर्जीवित करने और ठीक करने का वरदान मांगा साथ ही इस बात का उनमे से किसी को याद ना रहने और अजय होने का वरदान भी मांगा, महर्षि जमदग्नि ने उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी कर दें।





