तीन तलाक के विरोध में नई याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने किया इनकार


वरिष्ठ वकील सौम्य चक्रवर्ती ने कहा कि तलाक के तीनों रूप (अहसान तलाक, हसन तलाक और तलाक-उल-बिद्दत) मनमाना, मनमौजी और मुस्लिम महिलाओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने वाले हैं। उन्होंने कहा, ‘‘निकाह हलाला, बहु विवाह के साथ ही तलाक के तीनों रूप मुस्लिम महिलाओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है जो संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 के तहत उन्हें दिए गए हैं।’’
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पांच न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ ने छह दिन की लगातार सुनवायी के बाद तीन तलाक की प्रथा की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 18 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
केंद्र, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, ऑल इंडिया मुस्लिम वुमेन पर्सनल लॉ बोर्ड और अन्य समेत सभी पक्षकारों ने कोर्ट के समक्ष इस प्रथा के पक्ष और विरोध में अपनी दलीलें रखी थीं।





