टॉपर से इंटरव्यू में पूछा था- ‘आप पेशेंट के बेड पर किस तरफ बैठना पसंद करेंगी

भोपाल। दिल्ली के मौलाना मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने वाली भोपाल की डॉक्टर सौम्या झा ने पहले ही प्रयास में यूपीएससी क्लियर कर लिया। सौम्या की AIR-58 है। सिविल सेवा परीक्षा में सौम्या का मुख्य विषय भी मेडिकल साइंस ही था। सौम्या ने बताया कि नया विषय का चयन करना आसान नहीं था। चूंकि मेडिकल की पढ़ाई पूरी शिद्दत से की, इसलिए एग्जाम क्लियर करने में ज्यादा दिक्कत नहीं हुई।पढ़ें इंटरव्यू में सौम्या के किए गए सवाल और उनके जवाब…

मैसेज-
यूपीएससी क्लियर करने के लिए लोग तरह-तरह के फॉर्मूले अप्लाई करते हैं। मैं बस उनसे ये कहना चाहती हूं कि हार्ड वर्क की बजाए फोकस और स्मार्ट रीडिंग करें। टॉपिक को समझकर पढ़ें। मैं यूपीएससी के लिए नियमित रूप से 7-8 घंटे की पढ़ाई करती थी। परीक्षा की तैयारी के लिए किसी कोचिंग की सहायता नहीं ली।
यूपीएससी क्लियर करने के लिए लोग तरह-तरह के फॉर्मूले अप्लाई करते हैं। मैं बस उनसे ये कहना चाहती हूं कि हार्ड वर्क की बजाए फोकस और स्मार्ट रीडिंग करें। टॉपिक को समझकर पढ़ें। मैं यूपीएससी के लिए नियमित रूप से 7-8 घंटे की पढ़ाई करती थी। परीक्षा की तैयारी के लिए किसी कोचिंग की सहायता नहीं ली।
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कार्टून मूवीज और दोस्त माइंड को करते फ्रेश
कार्टून मूवीज और दोस्त मेरा माइंड फ्रेश करते हैं। पढ़ाई के तनाव को दूर करने के लिए मैं फैमिली के साथ वक्त बिताने के साथ ही दोस्तों के साथ बाहर घूमने निकल जाती थी।
सवाल: डॉक्टर्स के लिए बेड साइड मैनर्स क्या होता है, आप पेशेंट के बेड पर किस तरफ बैठना पसंद करेंगी?
जवाब: डॉक्टर्स के लिए बेड साइड मैनर का मतलब यह है कि वे अपने पेशेंट से ज्यादा बेहतर कम्युनिकेट कर पाएं। वे बैठते नहीं बल्कि पूरे वक्त खड़े रहकर पेशेंट का एक परिवार के मेम्बर की तरह ख्याल रखते हैं।
जवाब: डॉक्टर्स के लिए बेड साइड मैनर का मतलब यह है कि वे अपने पेशेंट से ज्यादा बेहतर कम्युनिकेट कर पाएं। वे बैठते नहीं बल्कि पूरे वक्त खड़े रहकर पेशेंट का एक परिवार के मेम्बर की तरह ख्याल रखते हैं।
सवालः एमबीबीएस के बाद पीजी क्यों नहीं किया?
जवाब: अगर मैं पीजी करती तो उन्हीं लोगों की मदद कर पाती जो मेरे पास इलाज के लिए आते। मैं तो उन लोगों तक भी पहुंचना चाहती हूं, जो जरूरत के वक्त भी घरों से बाहर नहीं निकल पाते। इसीलिए मैंने पीजी नहीं किया।
जवाब: अगर मैं पीजी करती तो उन्हीं लोगों की मदद कर पाती जो मेरे पास इलाज के लिए आते। मैं तो उन लोगों तक भी पहुंचना चाहती हूं, जो जरूरत के वक्त भी घरों से बाहर नहीं निकल पाते। इसीलिए मैंने पीजी नहीं किया।
सवालः सिविल सर्विस ज्वाइन करने की कोई खास वजह?
जवाबः एमबीबीएस के दौरान मैंने देखा कि हमारे पास 90 प्रतशित ऐसे पेशेंट आते थे, जिनकी बीमारी शुरुआत में ठीक की जा सकती थी। लेकिन, जागरूकता की कमी की वजह से वे अस्पताल तक पहुंचने में काफी वक्त लगा देते हैं। मैं सिविल सर्विसेज के माध्यम से ग्राउंड लेवल से बदलाव लाना चाहती हूं।
सवालः लोगों तक पहुंचने के लिए क्या करोगी?
जवाबः मैं लोगों की हेल्थ को लेकर काम करना चाहती हूं। इसके लिए मैं ग्राउंड लेवल से सर्वे करूंगी और लोगों से मिलूंगी।
जवाबः मैं लोगों की हेल्थ को लेकर काम करना चाहती हूं। इसके लिए मैं ग्राउंड लेवल से सर्वे करूंगी और लोगों से मिलूंगी।
सवालः गांव का मुखिया यदि लोगों तक सरकारी मदद नहीं पहुंचने देता है, तो आप क्या करेंगी?
जवाबः मैं पहले अपने लेवल पर जरूरी जानकारी इकट्ठा करूंगी। इसके बाद लोगों से बातचीत करूंगी और अंत में मुखिया से पूछताछ कर उसके खिलाफ एक्शन लूंगी।
जवाबः मैं पहले अपने लेवल पर जरूरी जानकारी इकट्ठा करूंगी। इसके बाद लोगों से बातचीत करूंगी और अंत में मुखिया से पूछताछ कर उसके खिलाफ एक्शन लूंगी।
सवालः सिविल सर्विस में आकर सिर्फ हेल्थ पर ही फोकस करेंगी?
जवाबःऐसा नहीं है कि सिर्फ हेल्थ पर ही काम करूंगी। मेरा फोकस मेरे क्षेत्र के ओवर ऑल ग्रोथ पर रहेगा। इसमें हेल्थ, न्यूट्रीशन, एजुकेशन, डेवलपमेंट और वूमेन राइट्स जैसी प्रॉब्लम्स को भी शामिल करूंगी।
जवाबःऐसा नहीं है कि सिर्फ हेल्थ पर ही काम करूंगी। मेरा फोकस मेरे क्षेत्र के ओवर ऑल ग्रोथ पर रहेगा। इसमें हेल्थ, न्यूट्रीशन, एजुकेशन, डेवलपमेंट और वूमेन राइट्स जैसी प्रॉब्लम्स को भी शामिल करूंगी।





