क्या आप भी ऑटोमैटिक कार चलाते हैं? क्या आप अपनी इस कार में लॉन्ग ड्राइव पर जाते हैं? क्या आपको भी स्लिम फिट वाली टाइट जींस पहनना पसंद है? अगर इन सभी सवालों का जवाब हां है तो आपके लिए हम लेकर आए हैं अनमोल सलाह जो आपकी जिंदगी बचा सकती है। अगर आप ऑटोमैटिक कार में लॉन्ग ड्राइव पर जा रहे हैं तो हर 1-2 घंटे बाद ब्रेक लें, रिलैक्स हो जाएं, पैरों को अच्छे से हिलाएं, टाइट कपड़े पहनने की बजाए कंफर्टेबल कपड़े पहनकर गाड़ी चलाएं और ड्राइव करते वक्त पानी पीते रहें ताकि शरीर में पानी की कमी ना हो।

ये सब हम आपके इसलिए कह रहे हैं क्योंकि अगर आपने जरा भी लापरवाही बरती तो आपके साथ भी वही हो सकता है जो वेस्ट दिल्ली के 30 साल के सौरभ शर्मा के साथ हुआ। सौरभ पिछले महीने मरते-मरते बचे जब वह पल्मोनरी एम्बोलिज्म का शिकार हो गए थे। दरअसल दिल्ली से ऋषिकेश और ऋषिकेश से दिल्ली ट्रैवल करने के दौरान सौरभ एक लग्जरी ऑटोमैटिक कार चला रहे थे। कार ऑटोमेटिक थी इसलिए उनके बाएं पैर का इस्तेमाल भी नहीं हो रहा था।
घंटों पैर मुड़ा रहा और टाइट जींस की वजह से पैर में खून सही तरीके से नहीं पहुंच पा रहा था। इस वजह से ड्राइव करते वक्त सौरभ के लेफ्ट पैर में ब्लड क्लॉट (खून का थक्का) बन गया। क्लॉट की वजह से उन्हें दर्द महसूस हुआ लेकिन शराब के नशे में उन्होंने इस दर्द को नजरअंदाज कर दिया। यह क्लॉट, खून में ट्रैवल करता हुआ पैरों से होते हुए फेफड़ों तक पहुंच गया जिससे उनके फेफड़ों की आर्टरी में ब्लॉकेज आ गई और उनके हार्ट और ब्रेन ने काम करना बंद कर दिया।
ल्मोनरी एम्बोलिज्म का शिकार हुए सौरभ
2 दिन बाद सौरभ जब ऑफिस पहुंचे तो उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी और वह अचानक बेहोश होकर गिर पड़े। अस्पताल में भर्ती कराने पर डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत ब्लड क्लॉट खोलने की दवा दी और फिर 45 मिनट तक सीपीआर दिया, तब जाकर सौरभ की सांस वापस आई। इलाज के बाद डॉक्टरों ने बताया कि इस भयानक पल्मोनरी एम्बोलिज्म की वजह 8 घंटे लंबी ड्राइव थी। सौरभ की टांग अकड़ गई थी और उस दौरान हलचल बिल्कुल नहीं हुई। वहीं सौरभ ने टाइट जीन्स पहनी थी, जो खून का थक्का जमने की एक वजह हो सकती है। डॉक्टर ने कहा कि पल्मोनरी एम्बोलिज्म एक जानलेवा समस्या है और इसके 50 प्रतिशत मामलों में दिल का दौरा पड़ता है।
पूरा शरीर नीला पड़ गया था
नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. योगेश कुमार छाबड़ा ने बताया कि जब उन्हें यहां लाया गया था, उस समय उनका पल्स 10-12 प्रति मिनट था और बीपी रिकॉर्ड नहीं हो रहा था। पूरा शरीर नीला पड़ गया था। इमरजेंसी में कार्डियोलॉजी टीम ने 45 मिनट तक सीपीआर देकर उसकी जान बचाई। 24 घंटों में उनका बीपी स्थिर हो गया। लेकिन उन्हें टॉइलट बिल्कुल नहीं आ रहा था। लंबे समय तक बीपी बहुत कम होने की वजह से उनकी किडनी ने सही से काम करना बंद कर दिया था। उनकी तुरंत कंटिन्युअल रीनल रिप्लेसमेंट थेरपी (सीआरआरटी) शुरू की गई। यह 24 घंटे जारी रहने वाला डायलेसिस है।