झारखंड की जनता बदलाव के लिए वोट करती आ रही: विधानसभा चुनाव

झारखंड विधानसभा चुनाव की जंग जीतने के लिए राजनीतिक पार्टियां सियासी समीकरण सेट करने में जुट गई हैं. पिछले चुनावी ट्रैक रिकॉर्ड को देखें तो प्रदेश में दूसरी बार चुनावी जंग फतह करना विधायकों के लिए मुश्किल भरा होता है. झारखंड में 50 फीसदी से ज्यादा विधायक अपनी सीट नहीं बचा पाते हैं और उन्हें हार का मुंह देखना पड़ता है. ऐसे में सियासी दल अपने-अपने मौजूदा विधायकों में से बड़ी संख्या में टिकट काटकर नए चेहरों पर दांव लगा सकते हैं.

मौजूदा समय में झारखंड में सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी है. सत्ता में वापसी के लिए बीजेपी हरसंभव कोशिश में जुट गई है और उसने 65 प्लस सीटें जीतने का टारगेट रखा है. सूत्रों की मानें तो बीजेपी अपने मौजूदा तीन मंत्रियों और लगभग एक दर्जन विधायकों को दोबारा से मौका देने के मूड में नहीं है. ऐसे में चुनाव जीतने वाले उम्मीदवार पर ही दांव खेलने की योजना बनाई है. ऐसे में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) भी अपने कई विधायकों का टिकट काटकर उनकी जगह नए चेहरे उतार सकती है.

बता दें कि झारखंड बनने के बाद से अब तक तीन बार विधानसभा चुनाव हुए हैं. 2005 से लेकर 2014 तक हुए चुनाव के वोटिंग ट्रेंड को देखें तो प्रदेश की जनता बदलाव के लिए वोट करती आ रही है. झारखंड बनने के बाद पहली बार 2005 में विधानसभा चुनाव में हुए तो राज्य के कुल 81 विधायकों में से 50 विधायकों को हार का मुंह देखना पड़ा.

Back to top button