जांच में फिर फेल हुए मैगी के सैंपल, कंपनी पर लाखों रुपए का जुर्माना

शाहजहांपुर. बहुराष्ट्रीय कंपनी का लोकप्रिय ब्रांड मैगी के कई उत्पादों के नमूने जांच में फेल हो गए हैं। जिला प्रशासन ने मैगी बनाने वाली कंपनी पर 35 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। न्याय निर्णायक अधिकारी/एडीएम प्रशासन जितेन्द्र कुमार शर्मा ने बताया- “सील किए गए नमूने जांच के लिए लखनऊ स्थित राजकीय जन विश्लेषक प्रयोगशाला भेजे गए थे। जांच में एश कंटेट (धातु भस्म) की मात्रा निर्धारित मानक से कई गुना अधिक पाई गई है।”
-इस मामले मे मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा दर्ज कराए मुकदमों की सुनवाई करते हुए खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 51 के तहत कंपनी को 35 लाख रुपये और उसकी इकाईयों के संचालकों को 5-5 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है।
-एडीएम प्रशासन ने विक्रेताओं और वितरकों पर भी 17 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। रिपोर्ट मे कहा गया है कि सभी नमूनों में टोटल एश कंटेट की मात्रा तय मानक से कई गुना अधिक है।
-कंपनी पर 35 लाख रुपये का जुर्माना के साथ और 2 फैक्ट्रियों पर 10 लाख रुपये जुर्माना किया गया है। इसी मामले में वितरक अनिल कपूर पर 10 लाख रुपये, प्रमोद लखोरिया और आदेश गुप्ता पर 2.5 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है। रवि किशोर और रिंकू गुप्ता को 1-1 लाख रुपये का जुर्माना देना होगा।
2015 में लिया गया था सैंपल
-29-30 मई और 8-12 जून 2015 को जिले में विभिन्न स्थानों से वितरकों और विक्रेताओं से मैगी छोटू, मैगी टू मिनट्स नूडल, मैगी मसाला, मैग वेज आटा नूडल्स, मैगी मीट्रिलिटियस, मैगी पास्ता आदि उत्पादों के सात नमूने सील किए गए थे।
-खाद्य पदार्थ में अखाद्य राख की भारी मिलावट को गंभीरता से लेते हुए सीएफएसओ ने एडीएम कोर्ट में कई विक्रेताओं विरूद्ध मुकदमे दर्ज कराए थे।
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क्या कहना है एसडीएम का का
-एडीएम प्रशासन जितेन्द्र कुमार शर्मा ने बताया- “इस कार्रवाई में खाद्य वस्तुओं का कारोबार करने वाली नामचीन कंपनियां अपने उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने के प्रति अधिक सतर्कता बरतेंगी।”





