नई दिल्ली. जस्टिस दीपक मिश्रा (63) देश के नए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बन गए हैं। साेमवार को सीजेआई के तौर पर उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शपथ दिलाई। वे देश के 45वें सीजेआई हैं। जस्टिस मिश्रा का टेन्योर 2 अक्टूबर 2018 तक रहेगा। उन्होंने जस्टिस जगदीश सिंह खेहर की जगह यह जिम्मेदारी संभाली है। जस्टिस खेहर रविवार को सीजेआई पोस्ट से रिटायर हो गए थे। बता दें कि जस्टिस मिश्रा की अगुआई वाली बेंच ने ही याकूब मेमन को फांसी की सजा सुनाई थी। उन्होंने ही सिनेमाघरों में फिल्म से पहले राष्ट्रगान बजाने का आदेश था। उनकी अगुआई वाली बेंच ने ही निर्भया रेप केस के दोषियों की फांसी की सजा को बरकरार रखा था। 
जस्टिस खेहर ने ही रिकमंड किया था नाम…
– जस्टिस दीपक मिश्रा का जन्म 3 अक्टूबर 1953 को ओडिशा में हुआ था। इनके पहले जस्टिस रंगनाथ मिश्रा और जस्टिस गोपाल वल्लभ पटनायक भी ओडिशा से थे और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रह चुके हैं।
– चीफ जस्टिस खेहर के बाद जस्टिस मिश्रा ही सुप्रीम कोर्ट में सबसे सीनियर जज थे। जस्टिस खेहर ने पिछले महीने जस्टिस मिश्रा का नाम सीजेआई के लिए रिकमंड किया था।
फैसले में लिखा था 192 शब्दों का वाक्य
– 19 मार्च 2015 को जस्टिस दीपक मिश्रा ने प्रियंका श्रीवास्तव बनाम उत्तर प्रदेश सरकार के एक मामले में अपना फैसला सुनाया था। इस फैसले की लाइनें खास थीं, इसमें शेक्सपियर और प्राचीन ग्रंथों के एग्जाम्पल थे। इसका एक वाक्य 192 शब्दों का था, जो भारत की ज्यूडिशियल हिस्ट्री में रिकॉर्ड माना जाता है।
इतिहास में पहली बार आधी रात को लगाई कोर्ट
– याकूब मेनन की फांसी पर 29 जुलाई 2015 को रोक लगाने की याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई। जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने 30 जुलाई 2015 को देश के इतिहास में पहली बार रात के ढाई बजे कोर्ट लगाई। इस कोर्ट में याचिका पर सुनवाई की गई और याकूब मेनन की फांसी की सजा को बरकरार रखते हुए याचिका को खारिज किया गया।
– इसी तरह 7 सितंबर 2016 को एक फैसले में जस्टिस मिश्रा ने दिल्ली पुलिस को अादेश दिया कि एफआईआर को 24 घंटे के भीतर वेबसाइट पर अपलोड किया जाए। इस फैसले में जस्टिस मिश्रा के साथ जस्टिस सी नागप्पन भी थे।
– पिछले ही साल उन्होंने देश में सेक्स रेशो की हालात पर चिंता जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि देश की स्थिति इतनी भयावह हो गई है कि लड़कों को शादी के लिए लड़कियां नहीं मिल रही हैं।
– यह टिप्पणी कर उन्होंने सभी सोशल नेटविर्कंग साइट्स को 36 घंटे के भीतर लिंग परीक्षण संबंधी जानकारी अपने यहां से हटाने का आदेश जारी किया था।
सिनेमाघरों में राष्ट्रगान
– 5 मई 2017 को बहुचर्चित निर्भया गैंग रेप केस में चारों दोषियों की फांसी की सजा को जस्टिस मिश्रा की अगुआई वाली बेंच ने बरकरार रखा था।
– बेंच ने ही कहा था कि पूरे देश में सिनेमा घरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान चलाया जाए और इस दौरान सिनेमा हॉल में मौजूद सभी लोग खड़े होंगे।
– ओडिशा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट अशोक परीजा ने दैनिक भास्कर से हुई बातचीत के दौरान बताया कि जस्टिस दीपक मिश्रा को उन्होंने उनके शुरुआती कॅरिअर के दौरान नजदीक से देखा है और उनके साथ प्रैक्टिस करने का उन्हें मौका भी मिला है।
– जस्टिस मिश्रा की सिविल, क्रिमिनल, कॉन्स्टीट्यूशनल और सर्विस से संबंधित केसों में गहरी पकड़ थी।
– वे बेहद कम उम्र में ही उड़ीसा के टॉप 5 वकीलों में गिने जाने लगे थे। जब उन्हें पहली बार जज बनाया गया था तो ओडिशा में उनकी लॉ की प्रैक्टिस चरम पर थी।
खाने के शौकीन
– सीनियर एडवोकेट अशोक परीजा ने बताया कि जस्टिस दीपक मिश्रा अपनी सेहत को लेकर काफी संजीदा हैं। रोजाना माॅर्निंग वॉक करना उनकी आदत है। वे खाने के शौकीन हैं, लेकिन वे हमेशा वही चीजें खाते हैं जो उनकी सेहत को नुकसान न पहुंचाएं।
– अभी वे अयोध्या राम मंदिर विवाद, सहारा सेबी विवाद और बीसीसीआई के मामलों की सुनवाई कर रहे हैं।
ओडिशा, मध्य प्रदेश, दिल्ली हाईकोर्ट में भी रह चुके हैं
– जस्टिस दीपक मिश्रा ओडिशा हाईकोर्ट में एडीशनल जज के तौर पर काम कर चुके हैं।
– ये मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी जज रहे हैं। 24 मई 2010 को ये दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने थे। 10 अक्टूबर 2011 को ये सुप्रीम कोर्ट में जज के तौर पर प्रमोट हुए थे।