छत्तीसगढ़ में विधायकी की रेस में 5 सांसद!

91 सदस्यीय छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में इस बार भाजपा अपने मिशन 65 प्लस को पूरा करने के लिए कुछ सांसदों को भी विधायकी के चुनाव में उतार सकती है। राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चा को सही मान लिया जाए, तो भाजपा के 5 सांसद रमेश बैस, लखन साहू, कमलभान सिंह, सरोज पांडेय और अभिषेक सिंह विधानसभा चुनाव लड़ते नजर आ सकते हैं।
चर्चा है कि भाजपा ने सांसद रमेश बैस को रायपुर ग्रामीण, तो राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय महासचिव सरोज पांडेय को दुर्ग विधानसभा से चुनाव लड़ाने का मन बना लिया है। इस बारे में पत्रकारों ने जब सरोज पांडेय का मन टटोलने के लिए सवाल किया, तो उनका कहना था, मैं पहले जब भी कोई चुनाव लड़ी हूं, पार्टी ने निर्णय किया था। अब भी पार्टी जो निर्णय करेगी, मैं उसके साथ बंधी हुई हूं। उनके इस बयान से उन दावों को बल मिल रहा है, जिनमें कहा जा रहा है कि हेमचंद यादव के निधन के बाद मजबूत दावेदार तलाश रही भाजपा सरोज को उम्मीदवार बना सकती है।
बिलासपुर सांसद लखन साहू को मुंगेली, कमलभान को अंबिकापुर और अभिषेक सिंह को कवर्धा से उम्मीदवार बनाया जा सकता है। मौजूदा समय में कवर्धा और मुंगेली में भाजपा विधायक हैं, जबकि अंबिकापुर में कांग्रेस विधायक है। कवर्धा में भाजपा विधायक का रिपोर्ट कार्ड कमजोर माना जा रहा है। सरोज और बैस को जिन सीटों पर चुनाव लड़ाने की चर्चा है वहां भी कांग्रेस विधायक हैं। ऐसी स्थिति में पार्टी की कोशिश है कि सांसदों को चुनाव मैदान में उतार कर हारी सीटों को जीता जाये।
सांसदों को विधानसभा चुनाव लड़ाने के चलते क्या भाजपा के लोकसभा समीकरण पर कोई असर पड़ेगा? इस बारे में राजनीतिक समीक्षकों का कहना है कि कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि विधायक और सांसद रहते हुए छह महीने एक पद पर रहा जा सकता है। ऐसे में विधायक चुने जाने के बाद भी मई में होने वाले लोकसभा चुनाव तक अगर भाजपा सांसद इस्तीफा नहीं देते हैं, तो उपचुनाव की नौबत नहीं आएगी।





