ग्वालियर के एजुकेशन पर मुझे गर्व, दिलाई राष्ट्रीय पहचान: डॉ. वीके सारस्वत

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ग्वालियर.नीति आयोग के सदस्य आैर जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के चांसलर पद्मभूषण डॉ. वीके सारस्वत से दैनिक भास्कर ने अपनी 49 वीं वर्षगांठ के मौके पर एक खास बातचीत की। बातचीत का मुद्दा उनकी शहर से जुड़ीं यादें, यहां का एजुकेशन सिस्टम आैर ग्वालियर को स्मार्ट सिटी बनाने की तैयारी था। ग्वालियर में जन्मे आैर अपनी आरंभिक शिक्षा यहीं पूरी करने वाले डॉ. सारस्वत ने कई बिंदुआें पर विस्तार से बात की, प्रस्तुत हैं उसके कुछ चुनिंदा अंश-
खास बातचीत :पद्मभूषण डॉ. वीके सारस्वत, चांसलर जेएनयू दिल्लीग्वालियर की कौन सी ऐसी चीज है, जिस पर आप गर्व या कहीं ग्वालियर का जिक्र आने पर चर्चा करते हैं?
– यहां पढ़े इंजीनियर, डॉक्टर्स, साइंटिस्ट आैर वकील, सभी ने शहर को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। आज का एमएलबी कॉलेज जो हमारे समय में विक्टोरिया कॉलेज हुआ करता था, उसके आसपास काफी हरियाली थी। मेडिकल कॉलेज से महल गेट तक साफ-सुथरा वातावरण आैर स्वच्छ हवा थी। आज भले ही उसका नाम थीम रोड है लेकिन न वहां स्वच्छ हवा है आैर न हरियाली।ये भी पढ़े: संघ की सबसे बड़ी जीत : देश के तीनों सबसे बड़े पदों पर राज कर रहे है ‘संघ के स्वयंसेवक’
आपकी नजर में ग्वालियर के डवलपमेंट के लिए कौन सी पांच चीजें हैं, जिनमें सुधार की ज्यादा जरूरत है?
– विकास के लिए इंट्रीग्रेटेड प्लानिंग की जरूरत है। इसमें अर्बन डवलपमेंट, रोड, ट्रैफिक, हाई-वे, इंटरनल रोड आैर ड्रेनेज सिस्टम प्रॉपर होना चाहिए। इसके साथ ही इंडस्ट्रियल कॉरिडोर भी हो, तभी ग्वालियर स्मार्ट सिटी बनेगी। बिना प्लानिंग के यह संभव नहीं है। यही वजह है कि ग्वालियर का 1950-60 में जो ढांचा था, हम उसे भी खराब कर चुके हैं।ग्वालियर में बारिश कम होती जा रही है। शहर में पेयजल सप्लाई का एक मात्र सोर्स अभी भी तिघरा है। एक साइंटिस्ट के नजरिए से आपकी राय में तिघरा का विकल्प क्या हो सकता है?
– जनसंख्या बढ़ी है आैर पानी की जरूरत भी। लेकिन विकल्प के बारे में किसी ने नहीं सोचा। तिघरा का कैचमेंट एरिया बढ़ाना चाहिए था। वह नहीं हुआ। आखिर, हम कब तक भगवान भरोसे रहेंगे? हमें री साइकिल ऑफ वाटर प्रोग्राम बनाना चाहिए। वाटर हार्वेंस्टिंग सिस्टम पर जोर देना चाहिए। चंबल से पानी लाना चाहिए। जब तेलंगाना में कृष्णा नदी से पानी लाया जा सकता है, तो ग्वालियर में चंबल से क्यों नहीं?तब आैर अब के ग्वालियर में क्या अंतर आया है?
– जनसंख्या बढ़ी है। लोग थोड़े जागरूक हुए हैं। लेकिन एजुकेशनल इंस्टीट्यूट खराब हुए हैं। व्यापार के लिए भी विकल्प नहीं हैं। प्रदेश की सरकार भी इस दिशा में कुछ नहीं कर रही है।





