गलती से भी ना न सुनें यह गाना, इसे सुनकर कई लोग कर चुके हैं आत्महत्या..!!

यह कहानी पढ़ने से पहले मैं यह सोचती थी कि आत्महत्या करने वाले वह होते है जो हालातों के आगे परेशान हो जाते हैं। आजकल आत्महत्या शब्द सुनना आम सी बात हो गई हैं।
अकसर अखबारों और समाचारों में पढ़ा व सुना जाता है कि आज इतने व्यक्तियों ने आत्महत्या कर ली। कोई फांसी लगाकर मर गया, किसी ने ज़हर खाकर दी जान और किसी ने हाथ की नस काट ली इत्यादि। अगर मैं आपको कहूँ कि लोग गाना सुनकर भी आत्महत्या कर रहें हैं तो इसके कुछ गलत नही होगा और आप शायद ही यकीन करेंगें। मेरे लिए इस बात को लिखना बढ़ा कठिन था, लेकिन जब बात सत्य की हों तो डर कैसा। ये बात बिल्कुल सच हैं कि कुछ लोगों ने गाने सुनकर अपनी जान दें दी। यह कहानी हैं ऐसे सॉन्ग राइटर की जो खुद परेशानियों से झूझ रहे थे। 34 साल के सेरेस हंगरी के रहने वाले थे, जिन्होनें यह गाना 1933 में लिखा था।
रेज़सो सेरेस का जन्म हंगरी में एक गरीब परिवार में हुआ था। सेरेस बचपन से ही बहुत होशियार थे, लेकिन गरीबी के चलते वह अपना मुक़ाम हासिल नही कर पाएं। गरीबी के कारण उनका बचपन बहुत कठिनाईयों के दौर से गुजरा और यही गरीबी, यहीं पीड़ा उनके दिल में घर कर गई। प्यार में कहाँ किसी का जोर चलता है। रेज़सो सेरेस भी हर लड़के की तरह एक लड़की को अपना दिल बैठे। एक तरफ सेरेस अपनी गरीबी से जूझ रहे थे तो दूसरी ओर उन्हें प्यार का रोग लग गया। प्यार किसी रोग से कम है क्या? प्यार हर किसी को रास नही आता और अगर बात करे सच्चे प्यार की तो वह कहानी अकसर अधूरी ही रहती हैं। रेज़सो सेरेस की गर्लफ्रेंड चाहती थी कि वे कही छोटी-मोटी नौकरी करें ताकि जीवन का निर्वाह आसानी से किया जा सकें। लेकिन सेरेस की रूचि संगीत में थी इसी बात पर उनकी गर्लफ्रेंड ने उन्हें छोड़ दिया।
सेरेस हंगरी के रहने वाले थे
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कौन थे सेरेस
प्यार में पड़े रेज़सो सेरेस
नहीं रास आई मोहब्बत
गर्लफ्रेंड ने की आत्महत्या
कहा जाता है कि सेरेस से बिछड़ने के बाद उनकी गर्लफ्रेंड ने आत्महत्या कर लीं, लेकिन इस बात के अभी तक कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं। ऐसा भी बताया जाता है, कि उनकी गर्लफ्रेंड के शव के पास एक नोट मिला था, जिसमें लिखा था ‘उदास रविवार’।
गर्लफ्रेंड की जुदाई में लिखा गाना
अपनी गर्लफ्रेंड की मौत की खबर सुन सेरेस यह दर्द नही सह पाए और उसकी जुदाई में उन्होनें यह गाना लिखा। यह गाना खूब प्रसिद्ध भी हुआ, लेकिन इसका कारण कुछ और ही था।
गाने का इतिहास
यह गाना सुनकर न जाने कितने लोगों ने आत्महत्या करने लगे इसलिए इस गाने का नाम उदास रविवार से बदलकर हंगरी सुसाइड सॉन्ग हो गया। इस गाने की प्रसिद्धि का एकमात्र कारण गाना सुनकर हंगरी में कई लोगों द्वारा की गई आत्महत्या थी।
कई आत्महत्या के किस्से है
इस गाने से जुड़ी कई कहानियां है। हंगरी में एक लड़की ने गाना सुनते-सुनते छत से कूद कर जान दे दी तो एक महिला ने ज़हर खाकर की आत्महत्या। इस गाने से न जाने कितने ही ऐसे किस्से जुड़े हुए हैं।





