गंगा कनेक्शन की वजह से है रिस्पना के पुनर्जीवन का एक्शन प्लान तैयार नहीं किया

उत्तराखंड सरकार ने देहरादून से बहने वाली रिस्पना नदी को यूं ही पुनर्जीवित करने का एक्शन प्लान तैयार नहीं किया है. दरअसल इसके पीछे की असली वजह है रिस्पना नदी का गंगा कनेक्शन.
गंगा कनेक्शन की वजह से है रिस्पना के पुनर्जीवन का एक्शन प्लान तैयार नहीं किया
मसूरी की पहाड़ियों से देहरादून की ओर गिरने वाला झरना रिस्पना नदी का उद्गम स्थल है. दूध की तरह दिखने वाला झरना और कल-कल बहता निर्मल जल रिस्पना नदी के महत्व को बयां करता है. यही वजह है कि राज्य सरकार अब रिस्पना को ऋषिपर्णा बनाना चाहती है.

उद्गम स्थल शिखरफाल में रिस्पना नदी जितनी सुंदर और स्वच्छ दिखती है उसके उलट देहरादून शहर में गंदी और नाले की तरह नजर आने वाली रिस्पना नदी गंगा की सहायक नदी है.

जल पुरुष और मैग्सेसे विजेता राजेन्द्र सिंह कहते हैं कि गंगा को साफ रखना है तो उसकी सहायक नदियों पर फोकस करना होगा. तभी गोमुख से गंगा सागर तक जीवनदायिनी गंगा को निर्मल बनाया जा सकता है.

गंगा नदी में गिरने वाली कई सहायक नदियों का डिस्चार्ज गंदे नालों की तरह ही है. उत्तराखंड सरकार ने इसी कड़ी में रिस्पना और कोसी नदी को पुनर्जीवित करने के लिए चुना है. रिस्पना के स्रोत तलाशने के लिए आईआईटी रूड़की की मदद भी ली जा रही है और जूनियर ईको टास्क फोर्स का गठन भी किया गया है.

रिस्पना के लिए संघर्ष करने वाली संस्था, मेकिंग अ डिफरेंस, के युवा भी खुश हैं कि उनकी मेहनत अब रंग ला रही है. मैड के युवाओं ने रिस्पना के कई स्रोत तलाश लिए हैं लेकिन लोगों की सहभागिता के बिना रिस्पना को पुनर्जीवित कर पाना संभव नहीं है.

गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए अब तक उठाए गए कदम पर्याप्त नहीं हैं. ऐसे में सहायक नदियों को पुनर्जीवित करने से ही स्वच्छ गंगा अभियान को अमली जामा पहनाया जा सकता है. सवाल यह है कि रिस्पना और दूसरी सहायक नदियों के लिए कब एक्शन प्लान बनाया जाएगा.

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