कैसे रुकेंगे हादसे, हाथ में सिर्फ 50 करोड

शिमला- प्रदेश की असुरक्षित सड़कों पर दुर्घटनाएं होती रहेंगी। इसके पीछे कारण यह है कि सुरक्षा की दृष्टि से सड़कों के किनारे लगाए गए पैरापिट वाहनों को सड़क पर रोकने के लिए काफी नहीं हैं। दो दिन पहले भारत-तिब्बत राजमार्ग-05 पर खनेरी में बस हादसा हुआ। किन्नौर जिला मुख्यालय से सोलन आ रही बस गहरी खाई में गिर गई और करीब 28 लोगों की मौत हो गई थी।

इसी तरह से त्यूणी के समीप एक बस हादसा हुआ था। जिसमें भी कई लोगों को मौत हो गई थी। इस प्रकार की दुर्घटनाएं प्रदेश के सभी जिलों में होती जा रही हैं। प्रदेश में दो हजार किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग हैं। इसके तहत 19 राष्ट्रीय राजमार्ग आते हैं। राज्य सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए तंग सड़कों को खोलने, सड़कों में सुधार करने और सुरक्षा की दृष्टि से पैरापिट लगाने व स्टील क्रैश बैरियर लगाने के लिए महज 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इस राशि में कई प्रकार के काम अंजाम दिए जाएंगे।
एक पैरापिट पर होते हैं दो हजार खर्च सड़कों के किनारे एक पैरापिट दो हजार रुपये की लागत से बनता है। पैरापिट की हालत ये है कि यह मोटरसाइकिल की टक्कर से टूट जाते हैं। देखने में आता है कि ठेकेदार पैरापिट निर्माण में केवल औपचारिकताएं बरतते हैं। मिट्टी भरकर बाहर से थोड़ा सीमेंट लेप किया जाता है। जोकि बारिश होने के बाद झडऩा शुरू हो जाता है। इस प्रकार के कच्चे पैरापिट वाहनों को रोकने में सहायक साबित नहीं होते।





