केरल लव जिहाद केस: पति से मिलने के बाद ही आजाद महसूस कर पाऊंगी- हदिया

सलेम. लव जिहाद केस से चर्चा में आईं केरल की हदिया ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तीन दिन बाद बुधवार को एक प्रेस कान्फ्रेंस में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वो अपने पति से मिलना चाहती हैं और एक भारतीय नागरिक की तरह आजादी से जीना चाहती हैं। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने हदिया को सलेम स्थित शिवराज मेडिकल कॉलेज में अपनी पढ़ाई पूरी करने के ऑर्डर दिए हैं।
‘पति के साथ रहना चाहती हूं’
– प्रेस कॉन्फ्रेंस में हदिया ने कहा, “भारतीय नागरिकों की तरह मैं भी सिर्फ अपने अधिकार चाहती हूं। इसका राजनीति और जाति से कोई लेना-देना नहीं है। मैं सिर्फ अपने लोगों से बात करना चाहती हूं।”
– हदिया ने आगे कहा, “मैंने कोर्ट से अपनी आजादी मांगी थी। मैं अपने पति से मिलना चाहती हूं, लेकिन हकीकत तो ये है कि मैं अभी तक आजाद नहीं हो पाई हूं।”
क्या है पूरा मामला?
– केरल में अखिला अशोकन उर्फ हदिया (25) ने शफीन नाम के मुस्लिम लड़के से दिसंबर 2016 में शादी की थी। लड़की के पिता एम अशोकन का आरोप था कि यह लव जिहाद का मामला है। उनकी बेटी की जबर्दस्ती धर्म बदलवाकर शादी की गई है।
– लड़की के पिता की पिटीशन पर हाईकोर्ट ने 25 मई को यह शादी रद्द कर दी थी। हदिया को उसके माता-पिता के पास रखने का आदेश दिया था। इसके बाद शफीन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
– कोर्ट ने लड़की के पिता को उसे पेश करने का ऑर्डर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान क्या हुआ?
– 27 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में हदिया के पति शफीन की तरफ से वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी। उन्होंने कहा, “जब हदिया यहां हैं तो कोर्ट को उसकी बात सुननी चाहिए, ना कि एनआईए की। उन्हें अपनी जिंदगी का फैसला लेने का हक है।”
– हदिया के पिता के वकील ने कहा था, “एनआईए ने शुरुआती रिपोर्ट सब्मिट की है। उसे देखा जाना चाहिए और उसके बाद उससे बात की जानी चाहिए।”
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‘सरकार के नहीं, पति के खर्च पर पढ़ाई करूंगी’
– सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई जस्टिस दीपक मिश्रा ने हदिया से पूछा कि क्या आप राज्य सरकार के खर्चे पर अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं?
– जवाब में हदिया ने कहा, “मैं जारी रखना चाहती हूं, लेकिन राज्य के खर्चे पर नहीं, जबकि मेरे पति (शफीन) इसका खर्चा उठा सकते हैं।”
‘धर्म बदलने के लिए मुझ पर दबाव नहीं’
– इससे पहले हदिया ने कहा था, ”मैं एक मुस्लिम हूं, पति के पास जाना चाहती हूं, कोई मुझे धर्म बदलने के लिए दबाव में नहीं ले सकता।”
– सुप्रीम कोर्ट ने हदिया को उसकी पढ़ाई के लिए तमिलनाडु के सलेम के एक कॉलेज ले जाने के आदेश दिए। यह भी कहा कि कॉलेज को उसे हॉस्टल फैसिलिटी देनी चाहिए। बता दें कि हदिया होम्योपैथी का कोर्स कर रही हैं।
– कोर्ट ने उसे सिक्युरिटी मुहैया कराने के भी आदेश दिए। सलेम के होम्योपैथिक कॉलेज के डीन को हदिया का कन्वीनर अप्वाइंट किया गया। हदिया को इस बात की छूट दी कि कोई परेशानी होने पर वह उनसे कॉन्टैक्ट कर सकती हैं।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने NIA को लगाई थी फटकार
– बेंच ने पिछली सुनवाई के दौरान नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) को फटकार लगाई। चीफ जस्टिस ने हलके अंदाज में पूछा था, “कानून में क्या कोई ऐसा है कि कोई लड़की किसी अपराधी से प्यार नहीं कर सकती?” कोर्ट ने कहा कि अगर लड़की बालिग है तो सिर्फ उसकी सहमति ही जरूरी होती है।”
– सुनवाई के दौरान NIA की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) मनिंदर सिंह ने बेंच से कहा कि राज्य में बहुत ही मेकैनाइज्ड मशीनरी एक्टिव है। वह राज्य में कट्टरता उभारने के काम में लगी है। वहां अब तक इस तरह के 89 मामले सामने आ चुके हैं।
– सिब्बल हदिया के पति शफीन की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पैरवी कर रहे थे। उन्होंने कहा, “मुझे इस बात का दुख है कि हम न्यूज चैनलों की बातों पर भरोसा कर रहे हैं। हमें इस बात से कोई मतलब नहीं कि हदिया की मंशा क्या है?”
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पिता का क्या आरोप है?
– हदिया के पिता की ओर से वकील श्याम दीवान ने दावा किया था कि उनकी बेटी का कथित पति एक कट्टर शख्स है और राज्य में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया जैसे कई ऑर्गनाइजेशन समाज को कट्टर बनाने में लगे हैं।
– महिला के पति शफीन की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने एनआईए और लड़की के पिता की दलीलों का विरोध किया।
केरल सरकार का क्या स्टैंड था?
– केरल सरकार ने 7 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में कहा था, “हिंदू महिला के मुस्लिम धर्म स्वीकार करने और मुस्लिम युवक से विवाह के मामले में NIA जांच की जरूरत नहीं है। इस मामले में पुलिस ने पूरी जांच की है और इसमें ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है, जिससे ये मामला NIA को सौंपा जाए





