केंद्रीय मंत्रिमंडल में रद्दोबदल के साथ गरमाई यूपी में भाजपा की राजनीति

दिखाई देगा मंत्रियों की छुट्टी करने और नये मंत्री बनाने का असर 
केंद्र व राज्य सरकार और संगठन में पूर्वांचल का दबदबा, पश्चिम को अभी और साधेगी पार्टी

लखनऊ। केंद्रीय मंत्रिमंडल में उत्तर प्रदेश से कई मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाने और कुछेक के पर कतरने को लेकर प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा की अंदरूनी राजनीति गरमा गई है। जिन मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है या फिर जिनका कद छोटा किया गया है उनके समर्थकों में निराशा के भाव हैं जबकि नये बने मंत्रियों के समर्थक उत्साह से लबरेज हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रिमंडल के अंदर-बाहर के इस खेल से अपनी पार्टी नेताओं को कड़ा संदेश दे दिया है। मोदी ने उमा भारती के जरिये दूसरे मंत्रियों को भी संदेश दे दिया है कि सिर्फ बातों से काम नहीं चलने वाला है, जो जिम्मेदारी दी गई है, उसे पूरा करना होगा। 
जीवन के 75 से अधिक बसंत देख चुके पार्टी के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र की मंत्रिमंडल से छुट्टी होने की चर्चा काफी पहले शुरू हो गई थी। बहाना यही था कि उनकी उम्र 75 से ऊपर हो चुकी है, लेकिन उनको हटाने के पीछे असल वजह यह भी रही कि वह तीन वर्ष के कार्यकाल में अपने को दमदार मंत्री के रूप में साबित नहीं कर सके। लघु एवं सूक्ष्म उद्योग मंत्री के रूप में देश को छोड़ दें तो यूपी में ही कुछ काम नहीं कर सके। हालांकि कलराज मिश्र को हटाने के साथ ही पूर्वांचल के एक दूसरे ब्राह्मण नेता को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। राज्यसभा सदस्य शिव प्रताप शुक्ल के मंत्री बनने से भाजपा में गोरखपुर मंडल की राजनीति गरम हो गई है, इसका आने वाले दिनों में असर भी दिखाई देगा।
पूर्वांचल में काशी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं सांसद हैं। गृहमंत्री राजनाथ सिंह सांसद भले ही लखनऊ से हों लेकिन उनकी राजनीतिक जमीन भी पूर्वांचल ही है। इनके अलावा रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा गाजीपुर के सांसद हैं। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूर्वांचल से ही आते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार में कई मंत्री पूर्वांचल से हैं फिर भी भाजपा लगातार पूर्वांचल को फोकस कर रही है। पूर्वांचल से ही डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय के रूप में पार्टी को नया प्रदेश अध्यक्ष मिला है। इस तरह यूपी सरकार और यूपी संगठन दोनों में पूर्वांचल का दबदबा हो गया है। ऐसे में एक और मंत्री पूर्वांचल से देना यह बता रहा है कि अगले चुनाव के लिए पार्टी इस क्षेत्र में कोई कसर बाकी नहीं छोडऩा चाहती। पश्चिमी यूपी की बागपत सीट से सांसद महाराष्ट्र कॉडर के आईपीएस सत्यपाल सिंह को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। पश्चिम की राजनीति में बागपत सीट की काफी अहम भूमिका रहती है। कभी यह चौधरी चरण सिंह की सीट हुआ करती थी, बाद में उनके बेटे चौ. अजित सिंह इस सीट से जीतते रहे हैं। फिर भी पूर्वांचल के मुकाबले पश्चिम की हिस्सेदारी केंद्र व राज्य दोनों ही सरकारों में कमजोर है जबकि भाजपा की झोली में आईं सीटों को देखें तो पूर्वांचल के मुकाबले पश्चिमी यूपी की भागीदारी कहीं ज्यादा है।

तैयारी पूरी थी, आरएसएस ने दखल देकर बचाई उमा की कुर्सी
मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और उत्तर प्रदेश के झांसी से सांसद उमा भारती को केंद्रीय मंत्रिमंडल से बाहर करने की पूरी तैयारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह ने कर ली थी लेकिन आरएसएस के दखल के कारण ऐसा नहीं हो सका। सूत्रों के अनुसार एक से तीन सितंबर के बीच मथुरा में संघ की तीन दिवसीय समन्वय बैठक में पार्टी की ओर से अध्यक्ष अमित शाह सहित अन्य नेताओं ने भी हिस्सा लिया था। इस दौरान शाह ने संघ के पदाधिकारियों को चर्चा के दौरान मोदी मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार से अवगत कराया, साथ ही उमा भारती सहित अन्य कई मंत्रियों के खराब परफॉर्मेस का जिक्र कर हटाने की बात कही थी। इसी दौरान संघ के पदाधिकारियों ने शाह को हिदायत दी कि उमा भारती को मंत्रिमंडल से बाहर न करें क्योंकि उमा की पहचान कट्टर हिंदूवादी और राममंदिर आंदोलन की लीडर की रूप में रही है। मंत्रिमंडल से निकाले जाने पर उमा भारती को दूसरी जिम्मेदारी देनी होगी, ऐसा न होने पर इसका गलत संदेश जनता में जाएगा। इसी के बाद उन्हें मंत्री बनाए रखने का फैसला लिया गया। हालांकि नमामि गंगा परियोजना लेकर उनका कद छोटा कर दिया गया। बताते हैं कि उमा भारती ने अपना गुस्सा शपथ ग्रहण समारोह में न पहुंचकर जाहिर भी कर दिया। उमा भारती पहले भी अपना गुस्सा दिखा चुकी हैं। उन्होंने एक बार अपनी अलग पार्टी भी बनाई थी। उमा भारती का लोधी वोट बैंक पर प्रभाव है।
पश्चिम की राजनीति में बागपत सीट की काफी अहम भूमिका रहती है। कभी यह चौधरी चरण सिंह की सीट हुआ करती थी, बाद में उनके बेटे चौ. अजित सिंह इस सीट से जीतते रहे हैं।

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