किंगमेेरकर की भूमिका में आई JJP की नई दिल्‍ली में हुई बैठक, पिता से मिलने तिहाड़ जेल गए दुष्यंत चौटाला…

Haryana Assembly Election 2019 Result के बाद किंगमेेरकर की भूमिका में आई जननायक जनता पार्टी की नई दिल्‍ली में बैठक हुई। बैठक में दुष्यंत चौटाला को जेजेपी विधायक दल का नेता चुना गया। ईश्वर सिंह को उपनेता और अमरजीत ढांडा को मुख्य सचेतक चुना गया। सरकार के गठन और नए सियासी समीकरण को लेकर चल रही गति‍विधियां में जेजेपी पर सबकी नजर है। इसी बीच दुष्‍यंत चौटाला पिता डॉ. अजय सिंह चौटाला से मिलने तिहाड़ जेल जा रहे हैं। माना जा रहा है कि वह अजय चौटाला से मिलकर आगे के रुख के बारे में चर्चा करेंगे।

दुष्‍यंत चौटाला को जेजेपी विधायक दल का नेता चुना गया

जेजेपी के विधायकों की बैठक होगी नई सरकार के गठन में पार्टी का रुख तय होगा। बताया जाता है कि भाजपा जेजेपी को साथ लाना चाहती है और अंदरखाते इसकी कोशिश चुनाव परिणाम के बाद ही शुरू हो गई थी। माना जा रहा है कि यदि जेजेपी राज्‍य में भाजपा के साथ आती है तो दुष्‍यंत चौटाला उपमुख्‍यमंत्री बन सकते हैं। दुष्‍यंत चौटाला जेजेपी विधायक दल की बैठक के बाद शाम चार बजे दिल्‍ली में प्रेसवार्ता करेंगे और इस बारे में अपना रुख स्‍पष्‍ट करेंगे। दूसरी ओर, बताया जा रहा है कि दुष्‍यंत चौटाला ने समर्थन के लिए भाजपा के समक्ष कुछ शर्तें रख सकते हैं।

सीएम मनोहरलाल के अचानक दिल्‍ली जाने को जेजेपी से समर्थन से जाेड़ा जा रहा

जेजेपी ने अब तक अपने रुख के बारे में स्‍पष्‍ट नहीं किया है। दुष्‍यंत चौटाला ने कहा है कि पार्टी के विधायक और वरिष्‍ठ नेता की बैठक में इस बारे में निर्णय किया जाएगा। जेजेपी विधायकों की बैठक नई दिल्‍ली में थोड़ी देर में शुरू होगी। दूसरी ओर, मुख्‍यमंत्री मनोहरलाल के अचानक आज सुबह दिल्‍ली जाने को भी जेजेपी से समर्थन लेने के मुद्दे से जोड़ा जा रहा है।

भाजपा के समक्ष कुछ शर्तें रख सकते हैं दुष्‍यंत चौटाला

दूसरी ओर चर्चाएं गर्म हैं कि दुष्‍यंत चौटाला ने सरकार गठन के लिए भाजपा के साथ आने के लिए कुछ शर्तें रख सकते हैं। सूत्रों के अनुसार दुष्यंत चौटाला ने भाजपा के सामने दादा ओमप्रकाश चौटाला और पिता डॉ. अजय चौटाला की रिहाई, प्रदेश की जेलों में बंद सभी जाट युवकों की रिहाई, खुद के लिए उपमुख्यमंत्री का पद व दो मंत्री पद की मांग रख सकते हैं।

सूत्रों का कहना है कि दुष्यंत चौटाला के नजदीकी सलाहकारों ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा को रोकने और खुद के विधायक दल को संगठित रखने के लिए इन शर्तों पर भाजपा के साथ जाने का सुझाव दिया है। दुष्यंत को यह समझाया गया है कि जाट युवकों की रिहाई की बात कहकर वह मनोहर सरकार को समर्थन देने का औचित्य सिद्ध कर सकेंगे और आलोचना की स्थिति में यह कह सकेंगे कि उन्होंने जाट युवकों की रिहाई के लिए कुर्बानी दी है।

भाजपा ने साधा बादल से संपर्क तो बन गई बात

बताया जाता है कि भाजपा प्रभारी डा. अनिल जैन ने सियासी गतिविधियों के बीच पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से संपर्क साधा। जैन ने बताया कि जननायक जनता पार्टी का समर्थन हासिल करने के लिए हमने प्रकाश सिंह बादल से बात की है। इसके बाद संकेत मिले हैं कि जेजेपी संयोजक दुष्यंत चौटाला नई सरकार के गठन में भाजपा के साथ आ सकते हैं। हालांकि, दुष्यंत की ओर से अभी इसकी कोई पुष्टि नहीं की गई।

डिप्टी सीएम हो सकते हैं दुष्यंत चौटाला

चर्चा है कि हरियाणा में यदि जननायक जनता पार्टी अल्पमत वाली भाजपा की सरकार बनवाने में सहयोग करती है तो वह सरकार में पावरफुल स्थिति में होंगे। भाजपा दुष्यंत चौटाला के लिए उप मुख्यमंत्री का पद रख सकती है। पूरी घटनाक्रम और आगे की राह तय करने के बारे में दुष्यंत चौटाला ने पार्टी के विधायक दल की बैठक दिल्ली में बुलाई ली।

भाजपा का यह है गणित

विधानसभा की कुल सीटें – 90

बहुमत चाहिए – 46 सीटें

भाजपा को सीटें – 40

जजपा की सीटें – 10

आजाद विधायक – सात

जजपा और आजाद विधायकों का समर्थन मिला तो भाजपा के पास होगा 57 विधायकों का समर्थन होगा। गोपाल कांडा व अभय चौटाला साथ हुए तो यह संख्या 59 हो जाएगी।

जजपा के बिना सरकार नहीं बना सकेगी कांग्रेस, निर्दलीय भी साथ नहीं 

दूसरी ओर, हरियाणा में कांग्रेस ने 31 सीटें जीती हैं। यदि जजपा समर्थन देती है, जिसकी संभावना बिल्कुल भी नहीं है तो कांग्रेस का संख्या बल 41 हो जाएगा। अधिकतर आजाद विधायक कांग्रेस के साथ नहीं हैं। इनेलो के अभय चौटाला का रुख भी भाजपा के प्रति नरम दिख रहा है। इसलिए यदि जजपा की ओर से कांग्रेस को कोई इशारा नहीं किया जाता तो कांग्रेस सरकार बनाने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं होगी। सोनिया गांधी ने हुड्ड़ा को जीत की बधाई देते हुए सरकार बनाने के लिए फ्री-हेंड दिया है।

53 साल में पहली बार दोबारा सत्ता में गैर कांग्रेसी दल

हरियाणा में अब तक कोई भी गैर कांग्रेसी दल पूर्ण बहुमत से दोबारा सत्ता में वापसी नहीं कर पाया है। भाजपा यदि सत्ता में आती है तो पहली गैर कांग्रेसी पार्टी होगी, जो लगातार दूसरी बार सरकार बनाएगी। 1977 में जनता पार्टी, 1987 में लोकदल, 1996 में हरियाणा विकास पार्टी (हविपा) की सरकार बनी। इसके बाद 2000 में भाजपा के सहयोग से इनेलो ने सरकार बनाई। लेकिन, अगले चुनाव में इन दलों को हार का सामना करना पड़ा था।

हमें सत्‍ता का लालच नहीं : अभय चौटाला

सिरसा। ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल करने के बाद अभय सिंह चौटाला ने कहा कि इनेलो ने हमेशा जनता के हितों की लड़ाई लड़ी है। आगे भी हमेशा लड़ते रहेंगे। मल्लेका में प्रधानमंत्री रैली करने आए थे, मैं तो उसी दिन चुनाव जीत गया था। प्रधानमंत्री का रैली में आना भाजपा की कमजोरी थी। ऐलनाबाद की जनता की जीत हुई है। इसके लिए मैं हमेशा आभारी रहूंगा। प्रदेश में स्पष्ट बहुमत किसी पार्टी को नहीं मिलेगा। यह मैंने चुनाव से पहले ही बता दिया था। हम कहां जाना है यह फैसला पार्टी के सीनियर लीडर लेंगे।

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