कालिदास के ‘मेघदूतम्’ में है इस जगह का नाम, सामने आई रहस्यमयी सुरंग

नागदा/इंदौर.एमपी के नागदा शहर से 12 किमी दूर स्थित एक गांव में निजी जमीन पर 15 फीट कुआं खोदने के बाद 2 फीट चौड़ी सुरंग निकली है। यह सुरंग उत्तर से दक्षिण की ओर जा रही है। सुरंग की करीब दो फीट खुदाई करने पर इसमें से पानी निकलने लगा है तो सभी ग्रामीण चौंक गए। इसकी खुदाई करने पर पानी के बहने की आवाज आ रही है, इसलिए दलदल होने की संभावना जताई जा रही है।
कालिदास के 'मेघदूतम्' में है इस जगह का नाम, सामने आई रहस्यमयी सुरंग
क्या है मामला…
-रानी पिपल्या निवासी रमेश वर्मा का खेत देव डूंगरी के मगरे के पास स्थित है।
-कुआं खुदाई का काम करीब 15 दिन से किया जा रहा था। 15 फीट की खुदाई के बाद पथरीली जमीन में 2 फीट चौड़ाई में मिट्टी नजर आई।
सुरंग में से पानी निकलने लगा
-रमेश के बेटे राकेश वर्मा व संजय वर्मा के मुताबिक इस सुरंग में से पानी निकलने लगा।
-जैसे-जैसे खुदाई की जा रही है वैसे-वैसे पानी बाहर आ रहा है और पानी के बहने की आवाज भी आ रही है।
-दलदल होने की संभावना पर काम को रोक दिया गया। ग्रामीणों ने चमत्कार बताकर यहां पूजा-अर्चना भी की।
 
क्षेत्र में 350-450 फीट पर मिलता है पानी
-पीएचई एसडीओ अभय गुप्ता के मुताबिक देवडूंगरी व रानी पिपल्या गांव में 350-450 फीट तक पानी उपलब्ध होता है।
-यहां 150 फीट पर लगे हैंडपंप भी इस वजह से बंद हो जाते हैं।
-गुप्ता के मुताबिक आमतौर पर किसी पहाड़ या मगरे पर पानी उपलब्ध करने के लिए उसकी ऊंचाई के दोगुना गहराई तक बोरिंग करना होता है।
-यानी पहाड़ या मगरे की ऊंचाई 50 फीट है तो 100 फीट पर पानी मिलेगा। इससे कम में पानी मिलना मुश्किल है।
-गुप्ता के अनुसार संभावना यह हो सकती है कि दो पहाड़ के बीच में से कोई झिरन जा रही हो उसका पानी 15 फीट पर मिल गया हो।
-30 फीट तक की गहराई में मिले पानी को पीने योग्य नहीं माना जाता है, क्योंकि इसमें बैक्टीरिया होते हैं, जो व्यक्ति को बीमार करते हैं।
-गुप्ता ने बताया कि इस पानी को टेस्ट के बाद ही बताया जा सकता है कि यह पीने योग्य है या नहीं।
कालिदास के मेघदूत में है देव डूंगरी का वर्णन
-विक्रम विश्वविद्यालय के जिला पुरातत्व संग्रहालय उपसंभाग प्रभारी डॉ. रमण सोलंकी के मुताबिक कालिदास के मेघदूत काव्य में देवडूंगरी गांव व यहां स्थित मंदिर का वर्णन आता है।
-जिसमें कालिदास मेघदूत को निर्देशित करते हैं कि वह उज्जैन महाकाल से होकर पश्चिम दिशा में पहाड़ देवडूंगरी स्थान पर जाकर रुके।
-कालीदास राजा विक्रमादित्य के नवरत्न में से एक माने गए हैं। ऐसे में यह साफ है कि देवडूंगरी गांव करीब 2 हजार साल पुराना है और ऐेतिहासिक स्थल है।
-डॉ. सोलंकी के मुताबिक मेघदूत यहां रुके हैं तो संभावना है कि कई पात्र या सामाग्री यहां मिल सकती है।
-मौके का निरीक्षण करने के बाद ही पता चल सकता है कि वास्तविक सुरंग है या नहीं, कहां से कहां जा रही है और यहां प्राचीनकालीन अवशेष है या नहीं।
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