कांग्रेस को लगा बड़ा झटका, अशोक तंवर ने पार्टी की से दिया इस्तीफा और कहा…..

Haryana Assembly Election 2019 में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। हरियाणा कांग्रेस के पूर्व प्रधान डॉ. अशोक तंवर ने पार्टी की से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी की कार्यवाहक राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा भेजा है। इससे राज्य में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा नुकसान हो सकता है। तंवर ने कहा कि बड़े दुख के साथ पार्टी छोड़नी पड़ रही है। उनको भारतीय जनता पार्टी सहित कई पार्टियों के ऑफर आ रहे हैं।
कहा- पार्टी के स्वार्थी नेताओं ने आतंरिक लोकतंत्र खत्म आरोप किया
कांग्रेस की कार्यवाहक राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे चार पेज के त्यागपत्र में डॉ. तंवर ने कहा है कि पार्टी का मौजूदा संकट राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की वजह से नहीं बल्कि गंभीर आंतरिक विरोधाभास से है। परिश्रमी कांग्रेस कार्यकर्ता जो किसी बड़े राजनीतिक घराने से नहीं आते और जिनके पास पैसा नहीं है, उनका पार्टी में कोई महत्व नहीं है।
तंवर ने कहा कि ब्लैकमेलिंग और गलत तरीके से अर्जित किए पैसे के बल पर कुछ लोग कांग्रेस के आंतरिक लोकतंत्र को ध्वस्त कर चुके हैं। ये लोग पार्टी में जमीनी स्तर पर काम करने वालों को आगे नहीं आने देना चाहते। मैं अकेले ऐसा नहीं हूं जो इन लोगों के शिकार हुए हैं, ऐसे हजारों कार्यकर्ता हैं जो इनकी वजह से अपनी जगह नहीं बना पाते।
तंवर ने लिखा है, कुछ सालों के अनुभव में मुझे अहसास हुआ है कि पिछले कुछ सालों में कांग्रेस के इन स्वार्थी नेताओं ने पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र का खात्मा कर दिया है। अब इन परिस्थितियों में मेरे लिए अपना और पिछड़े, दलित वर्ग के कार्यकर्ताओं का मान-सम्मान बनाए रखना आसान नहीं होगा।
बता दें कि अशोक तंवर ने Haryana Assembly Election 2019 के लिए कांग्रेस टिकट के बंटवारे से असंतुष्ट होकर दो-तीन दिन पहले पार्टी की चुनाव समिति सहित सभी कमेटियों से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने पार्टी टिकट बेचने का आरोप भी लगाया था। टिकट बंटवारे में धांधली का आरोप लगाते हुए तंवर ने नई दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय के बाहर समर्थकों के साथ प्रदर्शन किया था।
अशोक तंवर ने अपने इस्तीफे के बारे में ट्वीट कर जानकारी दी। तंवर ने कहा है कि पार्टी कार्यकर्ताओं से लंबे विचार-विमर्श के बाद मैंने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। इसके कारणाें के बारे में सभी कांग्रेसजनों और जनता को अच्छी तरह पता है।
बता दें कि अशोक तंवर को हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से छत्तीस का आंकड़ा रहा है। हुड्डा के करीब दो साल से बनाए जा रहे दबाव के बाद पार्टी नेतृत्व ने हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 (Haryana Assembly Election 2019) की घोषणा से ठीक पहले उनको प्रदेशाध्यक्ष के पद से हटा दिया था। इसके बाद कुमारी सैलजा को हरियाणा कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था। भूपेंद्र सिंह हुड्डा को चुनाव अभियान समिति की कमान देने के साथ विधायक दल का नेता बनाया गया था। चुनाव कमेटी सहित कई समितियों में तंवर को भी शामिल किया गया, लेकिन वह इनकी बैठकों में शामिल नहीं हुए।
इसके साथ ही तंवर ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। तंवर के समर्थकों ने हरियाणा में कांग्रेस टिकट की घोषणा से पहले नई दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय पर धरना दिया और प्रदर्शन किया। इसमें बाद में अशाेक तंवर भी पहुंचे और भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर जमकर निशाना साधा। इस क्रम में उन्होंने कांग्रेस के हरियाणा प्रभारी गुलाम नबी आजाद व अन्य नेताओं को भी निशाने पर लिया।
अशोक तंवर ने कांग्रेस टिकट बेचे जाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि सोहना विधानसभा सीट का टिकट पांच करोड़ रुपये में बेचा गया था। कांग्रेस प्रत्याशियों की घोषणा के बाद खुलासा हुआ कि सोहना से जिस व्यक्ति को टिकट दिया गया है उसकी कुल संपत्ति भी पांच करोड़ रुपये नहीं है। इससे अशोक तंवर की बहुत किरकिरी हुई। कुमारी सैलजा ने भी तंवर के बयान पर आपत्ति जताई और टिकट बांटने के आरोप को अनुचित करार दिया।
साेनिया गांधी को भेजा अशोक तंवर का इस्तीफा





