कहानी बसंत पंचमी कीः कुछ इस तरह से शुरू हुआ मां सरस्वती की पूजा का यह पर्व

बसंत पंचमी का दिन मां सरस्वती को समर्पित है। माता सरस्वती को बुद्धि और विद्या की देवी माना जाता है। इस महीने के दौरान मौसम काफी सुहावना हो जाता है। इस दौरान न तो ज्यादा ही गर्मी होती है और न ही ज्यादा ठंड होती है और यही वजह है कि बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा कहा जाता है। बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की खास पूजा की जाती है। इस दिन लोग अलग-अलग मूहर्त पर पूजा-पाठ करते हैं। आइए जानते हैं कब और किस तरह मां सरस्वती की वंदना करें।कहानी बसंत पंचमी कीः कुछ इस तरह से शुरू हुआ मां सरस्वती की पूजा का यह पर्व

पूजा की शुभ मूहर्त
बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा की शुभ मूहर्त 9 फरवरी को 12:26 से 12;41 तक
बसंत पंचमी शुरूः 9 फरवरी 2019 को 12:25 से
बसंत पंचमी समाप्त- 02:08, 10 फरवरी 2019

बसंत पंचमी है शुभ दिन
ज्योतिष के मुताबिक बसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। बसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।

जानिए क्यों मनाई जाती है बसंत पंचमी
हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन बसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी।

कैसे करें मां सरस्वती की पूजा
स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें।
सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।

इस दिन कामदेव की भी होती है पूजा
कामदेव को प्रेम और काम का देवता माना गया है। कुछ लोग बसंत पंचमी के दिन कामदेव की पूजा करते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं। इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है।

पूजा के दौरान सरस्वती मां के वंदना मंत्र
शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्।
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥२॥

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