कहानी केले की: केले दर्जन में क्यों? सेब क्यों नहीं? सन्तरे क्यों नहीं? आम क्यों नहीं?

संख्याओं के साथ समस्या यह है कि वे आपकी विशिष्टता से मुंह फेर लेती हैं। गुणधर्म यों तो गणित की इकाइयों के भी होते हैं, लेकिन उन गुणधर्मों की मार्फ़त इंसान हर समय सोचा नहीं करते। आम आदमी के लिए गणित का अर्थ संख्याएं हैं और संख्याओं का काम आर्थिक लेन-देन से अधिक और उच्चतर कुछ भी नहीं। सो गणितीयता की गुणधर्मिता होती होगी तो हुआ करे, वह गणितज्ञों के काम की ठहरी। रस-रंग, गन्ध-रूप और स्पर्श जैसी इन्द्रियों की शब्दावली के साथ संख्याओं को मानवता न बैठा सकी है और शायद कभी बैठा भी न सकेगी।

बच्चा अब भी वहीं है। केले दर्ज़न में क्यों? सेब क्यों नहीं? सन्तरे क्यों नहीं? आम क्यों नहीं?
कहानी केले की
कैवेंडिश सबग्रुप के केले





