कश्मीर में आर्टिकल पर मोदी सरकार हुई सख्त, बिलबिलाए उमर अब्दुल्ला ने दे डाली धमकी

जम्मू कश्मीर की समस्या की जड़ में कई सारी बातें हैं। आतंकवाद, अलगाववाद के साथ साथ राज्य को मिले विशेष दर्जे को भी इस समस्या का जड़ माना जाता है। आज भी देश में कई लोगों को ये नहीं पता होगा कि जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा क्या है। धारा 370 क्या है, आर्टिकल 35A क्या है। ये सारी चीजें हमेशा से पर्दे में रही हैं। इन पर कभी खुल कर बहस नहीं हुई। जो जैसे चलता आ रहा है उसे वैसे ही रहने दिया। केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद घाटी में जिस तरह से माहौल बदला है। सत्ता से कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस हट गई, बीजेपी और पीडीपी गठबंधन की सरकार है।

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कश्मीर के आर्टिकल 35A को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। इस मामले में केंद्र सरकार के रुख को देख कर राज्य की विरोधी पार्टियों में खलबली मच गई है। ये वो दल हैं जो कश्मीर का स्थायी समाधान कभी नहीं चाहते हैं। वो खुद को शायद पूरी तरह से हिंदुस्तानी भी नहीं मानते हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने तो खुली धमकी तक दे डाली है। उमर ने कहा कि अगर केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 35A के साथ छेड़छाड़ की या फिर उसमें बदलाव किया तो वो होगा जो कभी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अमरनाथ जमीन विवाद में जो हुआ वो कुछ नहीं था। उस से भी भयंकर परिणाम होगा। ये एक नेता की भाषा है। जो अपने ही देश की सरकार को धमकी दे रहे हैं।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि भारतीय संघ में किसा राज्य का विलय होना और राज्य को स्पेशल स्टेटस दिया जाना एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। अगर अनुच्छेद 35ए पर चर्चा होती है तो इसके हर कानूनी पहलू पर भी विचार किया जाना चाहिए। साथ ही भारत में कश्मीर के विलय को लेकर भी बहस होनी चाहिए। अब्दुल्ला केंद्र सरकार के रुख को देखते हुए अभी से विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं। अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार से सवाल किया है कि आखिर वो इस मुद्दे पर बहस के लिए तैयार कैसे हो गई। भारतीय संविधान में कश्मीर के स्पेशल स्टेटस को स्थापित किया गया है। उसमें किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है। ये भरोसे और विश्वास की धारा है। इस में छेड़छाड़ होने पर हंगामा हो जाएगा।
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बता दें कि आर्टिकल 35A के तहत जम्मू कश्मीर विधानसभा को ये अधिकार दिया गया है कि वो अपने अनुसार राज्य के स्थायी नागरिक की परिभाषा तय करे। इसके साथ ही उन्हें चिन्हित कर अलग अलग विशेषाधिकार भी दिया जा सकता है। बता दें कि धारा 370 जम्मू-कश्मीर को कुछ विशेष अधिकार प्रदान करता है। अनुच्छेद 35A को 1954 में एक आदेश के बाद संविधान में जोड़ा गया था। इसके तहत अगर कश्मीर की लड़की राज्य के बाहर शादी करती है तो उसे पैतृक संपत्ति में हिस्सा नहीं मिलेगा। इसके अलावा किसी दूसरे राज्य का शख्स कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकता है। इसी को लेकर एक महिला ने कोर्ट में अपील की थी। उसी पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। जिस पर उमर अब्दुल्ला समेत कुछ नेता बिलबिला रहे हैं।





